Ambedkar death date : भीमराव अंबेडकर की मृत्यु कब हुई थी, अंबेडकर पुण्यतिथि पर जानें ‘बाबा साहेब’ की‌ जिंदगी से जुड़ी 18 खास बातें

Dr BR Ambedkar 68th Death  Aniversary: दोस्तों, 14 अप्रैल 1891 को जन्मे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने देश में दलितों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण, अस्पृश्यता उन्मूलन तथा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने हेतु खूब लड़ाई लड़ी। इनसे संबंधित खास जानकारी के लिए Ambedkar death date post को पढ़ें।इस पोस्ट में बाबासाहेब के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।

भारत में प्रत्येक वर्ष 6 दिसंबर को भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि (Ambedkar death date) के उपलक्ष में महापरिनिर्वाण दिवस मनाया जाता है। आपको जानकारी होगी कि बाबासाहेब जन्म से बौद्ध नहीं थे, परंतु उन्होंने अपने अंत समय में अपने अभ्यास तथा दिल से बौद्ध धर्म को अपना लिया था।

बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के नाम से लोकप्रिय, भारतीय संविधान के वास्तुकार थे। इन्होंने प्रारूप समिति के सात सदस्यों में अध्यक्ष पद को सुशोभित कर संविधान निर्माण में काफी योगदान दिया।

प्रारूप समिति स्वतंत्र भारत के संविधान के प्रारूप को तैयार किया था। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ तथा प्रख्यात न्यायविद से।

इन्होंने अस्पृश्यता और जाति प्रतिबंध जैसी सामाजिक बुराइयों को मिटाकर समाज में एकरूपता लाने के लिए अथक प्रयास किये थे।

तो आइए बाबासाहेब की पुण्यतिथी (Ambedkar death date)  के मौके पर इनके जीवन से जुड़ी ऐसी बातों के बारे में जानते हैं जिसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है

(1).बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। ये अपने माता-पिता के 14वीं संतान थे।

(2).सकपाल उनका उपनाम था, एवं अंबावडे उनका गांव का प्रचलित नाम था। सामाजिक-आर्थिक भेदभाव तथा समाज के उच्च वर्गों के दुर्व्यवहार से बचने के लिए उन्होंने ब्राह्मण शिक्षक की सहायता से अपना उपनाम सतपाल से अंबेडकर में बदल दिया था।

(3).डॉ भीमराव अंबेडकर एक महान विद्वान होने के साथ-साथ एक वकील एवं स्वतंत्रता सेनानी भी थे।

(4) बाबा भीमराव अंबेडकर ने सैकड़ो हजारों महार अछूत जाति के लोगों के साथ बौद्ध धर्म में परिवर्तित होकर भारत में बौद्ध धर्म का चेहरा बदल दिया।इनका धर्मांतरण जातिगत असमानता के दमन का एक प्रतीकात्मक विरोध था।

(5).बाबासाहेब ने बचपन से ही जातिगत भेदभाव का अनुभव किया हुआ था। भारतीय सेवा से सेवानिवृत होने के पश्चात बाबा साहेब के पिता महाराष्ट्र के सतारा में बस गए थे। भीमराव का दाखिला स्थानीय स्कूल में कर दिया गया था, जहां उन्हें कक्षा में एक कोने में फर्श पर बैठाया जाता था तथा उनके शिक्षक उनकी कॉपी को भी स्पर्श नहीं करते थे।

(6).इन तमाम कठिनाइयों के बावजूद भीमराव अंबेडकर ने अपनी पढ़ाई जारी रखी तथा वर्ष 1908 में मुंबई विश्वविद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की।

(7).वर्ष 1913 में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने अपने पिता को खो दिया। इसी वर्ष बड़ौदा के महाराजा ने बाबा साहब को छात्रवृत्ति प्रदान की तथा उन्हें आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए अमेरिका भेज दिया।

(8).बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर अर्थशास्त्र एवं राजनीतिक विज्ञान का अध्ययन करने के लिए लंदन चले गए।

(9).सितंबर 1920 में पर्याप्त धन जमा करने के पश्चात भीमराव अंबेडकर अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए वापस लंदन गए। वंहा बैरिस्टर बने तथा विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण की।

(10).वर्ष 1947 में जब भारत देश आजाद हुआ, तब देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर को जो बंगाल से संविधान सभा के सदस्य के रूप में चुने गए थे। अपने मंत्रिमंडल में कानून मंत्री के रूप में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किए गए।

(11).संविधान सभा के द्वारा भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने का काम एक समिति को सौंपा गया था। इस समिति का नाम प्रारूप समिति था तथा इसके अध्यक्ष डॉक्टर भीमराव अंबेडकर थे।

(12).फरवरी 1948 में भीमराव अंबेडकर ने भारत के लोगों के समक्ष संविधान का मसौदा प्रस्तुत किया।इस  संविधान को 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा के द्वारा अपना लिया गया।

(13).वर्ष 1950 में अंबेडकर ने बौद्ध विद्वानों तथा भिक्षुओं के एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए श्रीलंका की यात्रा की, तथा अपनी वापसी के बाद बाबा साहब ने खुद को बौद्ध धर्म में परिवर्तित कर लिया।

(14).बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने 1955 में भारतीय बौद्ध महासभा की स्थापना की। उनकी पुस्तक “बुद्ध और उनका धम्म” इनकी मरणोपरांत प्रकाशित की गई थी।

(15).1956 में बुद्ध जयंती के अवसर पर बाबासाहेब बंबई में घोषणा कर दी की वे अब बौद्ध धर्म अपना लेंगे। इसलिए 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने अपने कई अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया।

(16).इसी दिन अंबेडकर के द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने के पश्चात उनके 5 लाख समर्थकों ने भी बौद्ध धर्म अपनाने के लिए एक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया।

(17).बाबासाहेब ने चौथे विश्व बौद्ध सम्मेलन में भाग लेने के लिए काठमांडू की यात्रा की थी। बाबासाहेब 2 दिसंबर 1956 को अपनी अंतिम पांडुलिपि “द बुद्धा या कार्ल मार्क्स” को पूरा कर लिया था।

(18).बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने स्वयं को भारत में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने बुद्ध और उनका धम्म शीर्षक से बौद्ध धर्म पर एक पुस्तक लिखी थी।उनकी एक और किताब है जिसका नाम “रिवॉल्यूशन एंड काउंटर रेवोल्यूशन इन इंडिया” है।

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अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।💐💐

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