bharat ke sanvidhan nirman ki prakriya ko samjhaie | भारतीय संविधान का निर्माण प्रक्रिया को समझाइए

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।साथ ही इस देश का संविधान, विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। देश का कानून  संविधान के द्वारा ही संचालित किया जाता है। भारत के संविधान निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए bharat ke sanvidhan nirman ki prakriya ko samjhaie पोस्ट को अंत तक पढ़े।

वर्ष 2015 से हमारे देश में प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। शायद आपको जानकारी भी होगी कि देश में जब भी कोई संकट आता है, या राजनीतिक विवाद खड़े होते हैं। तब-तब संविधान का ही हवाला देकर उस विवाद को या संकट को हल करने की बात की जाती है।

देश का संविधान आजादी के इतने लंबे समय हो जाने के पश्चात भी अपने महत्व को कम नहीं होने दिया है। बल्कि यूं कहा जाए तो यह संविधान अब किसी धर्म ग्रंथ से भी ज्यादा पूजनीय और पवित्र बन चुका है।

लेकिन, हमारे देश के संविधान के निर्माण से जुड़े कई ऐसे तथ्य हैं, जिसके बारे में बहुत कम ही लोगों की जानकारी होती है। यदि आप भारतीय संविधान के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं , तो इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़े।

तो आइए भारतीय संविधान से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं:-

संविधान क्या है? इससे आप क्या समझते हैं?

संविधान एक ऐसा लेख पत्र या दस्तावेज होता है, जो सरकार की रूपरेखा व प्रमुख कृतियों का निर्धारण करता है। इसे देश की सर्वोत्तम आधारभूत कानून भी कहा जाता है।यह वही दस्तावेज होता है, जो राज्य के समस्त अंगों जैसे की विधायिका, कार्यपालिका, और न्यायपालिका को शक्तियां प्रदान करता है। इन तीनों को संविधान की मर्यादाओं में रहते हुए अपनी कर्तव्यों का निर्वहन करने हेतु प्रेरित करता है।

संविधान को अंग्रेजी भाषा में कॉन्स्टिट्यूशन कहा जाता है, जो लैटिन शब्द कांस्टीट्यूट से उत्पन्न हुई है। इसका अर्थ होता है शासन करने वाला सिद्धांत

अर्थात संविधान को दूसरे शब्दों में आप यह भी कह सकते हैं, कि किसी देश का शासन जिन नियमों एवं सिद्धांतों के अनुसार चलाया जाता है, उन सिद्धांत या नियमों के समूह को संविधान कहा जाता है।

संविधान के द्वारा ही प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से राज्य की सर्वोच्च सत्ता की शक्ति के वितरण और प्रयोग निर्धारित किया जाता है।

आधुनिक समय की बात की जाए तो विश्व में सर्वप्रथम संयुक्त राज्य अमेरिका में लिखित संविधान का निर्माण हुआ। इस इस देश के संविधान का निर्माण 1787 में फिलाडेल्फिया सम्मेलन के पश्चात हुआ था।

संविधान की परिभाषा

• संविधान किसी देश का एक मौलिक दस्तावेज एवं  सर्वोच्च विधि होता है।

• संविधान के द्वारा ही राज्य के अंगों की शक्तियों का निर्धारण किया जाता है।

• संविधान के द्वारा राज्य के अधिकार को मर्यादित कर उसे निरंकुश एवं तानाशाह होने से रोका जाता है।

• किसी देश का संविधान उस देश की जनता की आशाओं आकांक्षाओं का पुंज होता है।

संविधान का उद्देश्य

संविधान का उद्देश्य निम्नलिखित है:-

• सरकार के अंगों ( विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका ) का सृजन करना एवं उसे मर्यादित कर निरंकुश होने से रोकना।

• सरकार के अंगों की शक्तियों जैसे कर्तव्य दायित्व आदि को निर्धारित करता है।

• सरकार के सभी अंगों के बीच संबंधों को स्पष्ट करना और उनके बीच समन्वय स्थापित करना।

संविधान का प्रयोग

✓संविधान का निर्माण पहली बार एथेंस (यूनान) में हुआ था। आधुनिक युग में अमेरिका का संविधान सर्वप्रथम लिखित संविधान का रूप धारण किया।

✓इंग्लैंड को संसदीय सरकार का उद्गम स्थान माना जाता है, एवं संयुक्त राज्य अमेरिका को अध्यक्षात्मक सरकार का जन्मदाता कहा जाता है।

✓संविधान के द्वारा नागरिकों के मौलिक अधिकारों एवं मौलिक कर्तव्यों तथा नीति निर्देशक तत्व आदि का उल्लेख करना।

संविधान निर्माण की क्रमिक मांग

✓सैद्धांतिक रूप से संविधान का विचार ब्रिटिश सरकार हेनरी मैन के द्वारा प्रस्तुत किया गया था, एवं व्यावहारिक रूप से सर्वप्रथम संविधान निर्माण के लिए अमेरिका में संविधान सभा का गठन हुआ था।

✓संविधान सभा के सिद्धांत के दर्शन सर्वप्रथम 1895 के स्वराज विधेयक में हुआ था, जिसे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के निर्देशानुसार तैयार किया गया था।

✓संविधान सभा का सुझाव पहली बार महात्मा गांधी जी के द्वारा सन 1922 में हरिजन नामक पत्र में स्पष्ट किया गया था, की भारत का संविधान भारतीयों को स्वयं बनाने का अधिकार मिलना चाहिए।

✓ भारतीय संविधान का निर्माण एक संविधान सभा के द्वारा किया गया था। जून 1934 में सर्वप्रथम संविधान सभा के लिए औपचारिक रूप से एक निश्चित मांग पेस हुई थी।

✓वर्ष 1936 में लखनऊ में संपन्न हुए अखिल भारतीय कांग्रेस अधिवेशन में भारत के लिए प्रजातांत्रिक संविधान बनाने हेतु एक संविधान सभा की मांग प्रस्तुत की गई थी।

✓अगस्त प्रस्ताव 1940 में सर्वप्रथम संविधान सभा की मांग को ब्रिटिश सरकार के द्वारा आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया था।

✓1942 में आए क्रिप्स प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से संविधान सभा के रूपरेखा के बारे में बात की गई थी।

✓वर्ष 1946 में ब्रिटिश मंत्रिमंडलीय शिष्ट मंडल के द्वारा अपनी योजना के अंतर्गत वर्तमान संविधान सभा की संरचना बनाई गई थी।

कैबिनेट मिशन योजना

उल्लेखनीय है कि, भारत के वर्तमान संविधान को बनाने हेतु आजादी के पूर्व ही प्रयास किया जा रहे थे। दरअसल अंग्रेजी सरकार को यह पता चल गया था ,कि उन्हें जल्द ही अब भारत को छोड़कर जाना पड़ेगा। इसलिए भारत के संविधान के निर्माण के लिए काम करना शुरू कर दिया था।

✓संसदीय प्रतिनिधि मंडल के रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद वर्ष 1946 में एक त्रिस्तरीय प्रतिनिधि मंडल भारत आया था। इसी मंडल को कैबिनेट मिशन के नाम से जाना गया।

✓मिशन के अध्यक्ष पथिक लॉरेंस( भारत सचिव) व ब्रिटेन व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष स्टेफर्ड क्रिप्स तथा नौसेना अध्यक्ष ए.बी. एलेक्जेंडर सदस्य के रूप में आए थे।

✓कैबिनेट मिशन का मूल उद्देश्य कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता करना तथा वायसराय को भारत की संविधान सभा के गठन में सहायता करना था।

✓भारत में संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के प्रावधानों के अनुसार अप्रत्यक्ष रूप से राज्यों के विधानसभाओं द्वारा वर्ष 1946 में हुआ था। इस निर्वाचन में केवल तीन संप्रदायों मुस्लिम सिख एवं अन्य हिंदू में विभक्त किया गया था।

✓चीफ कमिश्नरी प्रांतों को भी संविधान सभा में प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया था।

✓कैबिनेट मिशन के अनुसार संविधान सभा के सदस्यों की संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिनमें 229 प्रांतो, 93 देसी रियासतों एवं चार कमिश्नरी क्षेत्रों में से चुने जाने थे। प्रांत और देशी रियासतों में जनसंख्या के अनुसार सिट आवंटित किए गए थे। लगभग 10 लाख की जनसंख्या पर एक सीट निर्धारित किए गए थे।

✓विधानसभा में महिलाओं की संख्या 9 एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों की संख्या 33 थी।

संविधान निर्माण प्रक्रिया के विभिन्न चरण एवं इससे जुड़े तथ्य

✓ संविधान सभा के प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी। इस संविधान सभा का अध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा को बनाया गया था ।इस बैठक का मुस्लिम लीग के द्वारा बहिष्कार किया गया था।

✓12 दिसंबर 1946 को डॉ राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष बनाया गया।

✓श्री बी. एन. राव संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार पद पर नियुक्त हुए थे।

✓दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू जी के द्वारा संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था।इसी के साथ संविधान निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। इस प्रस्ताव को संविधान सभा के द्वारा 22 जून 1947 को पारित कर दिया गया।

✓संविधान निर्माण हेतु विभिन्न समितियां का गठन किया गया था जैसे:-

• प्रक्रिया समिति

• वार्ता समिति

• संचालन समिति

• कार्य समिति

• संविधान समिति

• झंडा समिति आदि।

✓विभिन्न समितियां में प्रारूप समिति प्रमुख थी, जो की 19 अगस्त 1947 को गठित की गई थी। इस समिति का अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर थे।

✓संविधान सभा की बैठक तृतीय वाचन के लिए 14 नवंबर 1949 को की गई एवं यह बैठक 26 नवंबर 1949 को समाप्त हुई।

✓इस संविधान सभा के द्वारा भारतीय संविधान का निर्माण 2 वर्ष 11 महीने तथा 18 दिन में किया गया।

✓संविधान सभा के द्वारा 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को अंगीकृत कर लिया गया था, लेकिन 26 जनवरी 1950 को संपूर्ण भारत लागू किया गया। इसी दिन भारत को गणतांत्रिक देश घोषित किया गया।

✓संविधान सभा को ही आगामी संसद के चुनाव तक भारतीय संसद के रूप में मान्यता प्रदान की गई थी यही सभा भारतीय संसद के रूप में काम करती रही।

✓ भारतीय संविधान निर्माण के पीछे मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम, आचार्य कृपलानी, टीटी कृष्णमाचारी एवं डॉ भीमराव अंबेडकर का मस्तिष्क था। कुछ प्रमुख व्यक्तियों के द्वारा डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को संविधान का पिता कहा गया।

✓भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा एवं लिखित संविधान है।

संविधान सभा की विभिन्न समितियां

संविधान सभा के द्वारा भारतीय संविधान को तैयार करने  हेतु 13 समितियां का गठन किया गया था।इन समितियां ने अगस्त 1947 तक अपनी-अपनी रिपोर्ट भेजी। इसके पश्चात उन रिपोर्ट्स पर संविधान सभा के द्वारा विचार किया गया।

✓एन.माधव राव, बी.एल. मित्र के स्थान पर नियुक्त हुए थे।

✓प्रारूप समिति के सदस्यों में श्री एन. गोपाल स्वामी आयंगर, अल्लादी कृष्णा स्वामी अय्यर, मोहम्मद सादुल्ला, के एम .मुंशी ,बी .एल. मित्र और डीपी खोतान शामिल थे।

✓डॉ भीमराव अंबेडकर संविधान सभा के सदस्य के लिए बंगाल से निर्वाचित किए गए थे।

✓संविधान सभा के सदस्यता अस्वीकार करने वालों में महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण एवं तेज बहादुर सप्रू प्रमुख थे।

संविधान की प्रकृति एवं स्वरूप

✓मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 4 परिशिष्ट एवं 8 अनुसूचियां थी, जबकि वर्तमान में अनुच्छेदों की संख्या 395, 25 भाग, 5 परिशिष्ट एवं 12 अनुसूचियां हैं।

✓भारतीय संविधान एकात्मक और संघात्मक दोनों का मिश्रण है। भारत का संविधान संघीय कम एवं एकात्मक अधिक है – डी.डी.बसु।

✓भारतीय संविधान अर्ध संघीय है-के. सी. व्हीलर।

✓ भारत का पुडुचेरी एक ऐसा राज्य है जहां पर फ्रेंच सबसे अधिक बोली जाती है।

भारतीय संविधान का स्रोत

✓विदेशी स्त्रोत

(1).संयुक्त राज्य अमेरिका से लिए गए प्रावधान

मौलिक अधिकार,

• राज्य की कार्यपालिका के प्रमुख तथा सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर के रूप में होने का प्रावधान,

• न्यायिक पुनरावलोकन,

• संविधान की सर्वोच्चता,

•उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की विधि एवं वित्तीय आपात। 

• निर्वाचित राष्ट्रपति एवं उस पर महाभियोग,

•उपराष्ट्रपति,

•न्यायपालिका की स्वतंत्रता,

(2).ब्रिटेन से लिए गए प्रावधान

• संसदात्मक शासन-प्रणाली,

• एकल नागरिकता, 

• विधि निर्माण प्रक्रिया,

• मंत्रियों के उत्तरदायित्व वाले संसदीय प्रणाली।

(3).आयरलैंड से लिए गए प्रावधान

• नीति निर्देशक सिद्धांत,

• राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल की व्यवस्था,

• राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में साहित्य, कला, विज्ञान तथा समाज सेवा इत्यादि के क्षेत्र में विख्यात व्यक्तियों का मनोनयन,

• आपातकालीन उपबंध

( 4).ऑस्ट्रेलिया से लिए गए प्रावधान

• प्रस्तावना की भाषा,

• समवर्ती सूची का प्रावधान,

• केंद्र और राज्यों के बीच संबंध,

• शक्तियों का विभाजन, 

• संसदीय विशेषाधिकार,

(5).जर्मनी से लिए गए प्रावधान

• आपातकाल के परावर्तन के समय राष्ट्रपति को मौलिक अधिकार संबंधी शक्तियां

(6).कनाडा से लिए गए प्रावधान

• संघात्मक विशेषताएं,

• अवशिष्ट शक्तियां केंद्र के पास

(7).दक्षिण अफ्रीका से लिए गए प्रावधान

• संविधान संशोधन की प्रक्रिया,

( 8).रुस से लिए गए प्रावधान

•  मौलिक कर्तव्य

( 9).जापान से लिए गए प्रावधान

• विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया

(10). स्विट्जरलैंड से लिए गए प्रावधान

• संविधान की सभी सामाजिक नीतियों के संदर्भ में नीति निर्देशक तत्वों का उपबंध

(11).फ्रांस से लिए गए प्रावधान

• गणतांत्रिक व्यवस्था,

• अध्यादेश ,

• नियम,

• विनियम,

• आदेश,

• संविधान विशेषज्ञ के विचार,

• न्यायिक निर्णय,

• संविधियां

✓भारतीय स्त्रोत

भारतीय संविधान के स्रोत में हम भारत के लोग तथा भारत शासन अधिनियम 1935 शामिल है ।395 अनुच्छेदों में से लगभग 250 अनुच्छेद इसी में से लिए गए हैं, या उन में थोड़ा परिवर्तन करके अपनाया गया है।

1935 भारत शासन अधिनियम के प्रमुख प्रावधान

• संघ तथा राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन,

• राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां,

• अल्पसंख्यक वर्गों के हितों की रक्षा,

• उच्चतम न्यायालय का निम्न स्तर के न्यायालय पर नियंत्रण,

• केंद्रीय शासन का राज्य के शासन में हस्तक्षेप,

• व्यवस्थापिका के दो सदन,

देसी रियासतों के बारे में  

✓देसी रियासतों को भारत में शामिल करने हेतु सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में एक रियासती मंत्रालय बनाया गया था।

✓जुनागढ़ रियासत को संग्रह के आधार पर हैदराबाद रियासत को पुलिस कार्यवाही के द्वारा एवं जम्मू कश्मीर रियासत को विलय पत्र पर हस्ताक्षर करवा कर भारत में सम्मिलित किया गया था।

✓पाकिस्तान के रूप में एक अलग राज्य का निर्माण होने के कारण सिंध, बलूचिस्तान, उत्तर-पश्चिमी सीमा, बंगाल, पंजाब तथा असम के सिलहट जिलों के प्रतिनिधि संविधान सभा के सदस्य नहीं रहे थे।

भारतीय संविधान के एकात्मक एवं संघात्मक लक्षण

✓विश्व का सबसे लंबा एवं लिखित संविधान 

✓साधारण समय में संघात्मक रूप एवं विपरीत परिस्थितियों में अर्थात आपातकाल में एकात्मक रूप धारण करना

✓भारतीय संविधान सभी नागरिकों को एक समान नागरिकता प्रदान करता है, तथा पंथनिरपेक्षता की घोषणा करता है।

✓भारतीय संविधान संप्रभु है एवं न्यायिक सर्वोच्चता में समन्वय है।

✓विशालता एवं लिपि बद्धता तथा संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य।

✓समाजवादी एवं पंथनिरपेक्ष राज्य एवं एकल नागरिकता का प्रावधान किया गया है।

✓मूल कर्तव्यों के लिपि बद्धता एवं वयस्क तथा सार्वजनिक मताधिकार का प्रावधान।

✓लिखित संविधान

✓संविधान की सर्वोच्चता

✓स्वतंत्र न्यायपालिका

✓मौलिक अधिकार,

✓न्यायपालिका की स्वतंत्रता ,

✓नीति निर्देशक तत्व ,

✓संघीय शासन प्रणाली का प्रावधान,

✓संसदीय एवं अध्यक्षात्मक पद्धतियों का समन्वय ,एवं अल्पसंख्यक तथा पिछड़ी जाति के हितों के रक्षा करने का प्रावधान,

✓ संविधान की सर्वोच्चता एवं लोकप्रिय सत्ता पर आधारित संविधान,

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर : प्रारूप समिति के अध्यक्ष

डॉ बी. एन. राव द्वारा तैयार किए गए संविधान के प्रारूप पर विचार करने हेतु संविधान सभा के द्वारा डॉ भीमराव अंबेडकर के अध्यक्षता में प्रारूप समिति का गठन किया गया।

• प्रारूप समिति के द्वारा बनाए गए पहले प्रारूप में 243 अनुच्छेद एवं 13 अनुसूचियां थी।

• परिवर्तन होने के पश्चात दूसरे प्रारूप में 315 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी,

• तीसरे प्रारूप में 395 अनुच्छेद एवं 8 अनुसूचियां थी।

प्रारूप समिति के द्वारा बनाए गए तीसरे प्रारूप को ही 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन में तैयार किया गया ।इसे 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा के द्वारा अंगीकृत कर लिया गया तथा 26 जनवरी 1950 को भारत पर लागू कर दिया गया।

संविधान सभा की प्रमुख महिलाएं

कादंबरी गांगुली

यह भारत की पहली महिला ग्रेजुएट थी।ये कोलकाता विश्वविद्यालय या कांग्रेस अधिवेशन को संबोधित करने वाली भी पहली महिला थीं।

संविधान की अनुसूचियों के बारे में 

• सूची अनुसूची किसी लेख से संबंधित एक पूरक विवरण का कथन होता है।

• किसी अनुसूची में संविधान के किसी निश्चित अनुच्छेद के कथन वर्णन किया गया होता है। 

• अनुसूची में संविधान के किसी अनुच्छेद की व्याख्या निहित होती है।

• अनुसूचियां संविधान का एक भाग है।

• अनुसूचियां संसद के संशोधन की शक्ति की अधीन होती हैं।

संवैधानिक उपबंध के अनुसार कुछ अनुसूचियां में संशोधन हेतु अनुच्छेद 368 का प्रयोग किया जाता है, और कुछ अनुसूचियां में संशोधन संसद के साधारण प्रक्रिया द्वारा ही किया जाता है। 

पहली अनुसूची

इस अनुसूची में अनुच्छेद 1 से अनुच्छेद 4 तक की व्याख्या की गई है। इसमें 28 राज्यों और 8 राज्य क्षेत्र का विवरण दिया गया है।

दूसरी अनुसूची 

इस अनुसूची में संवैधानिक पदों जैसे राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति एवं उपसभापति, राज्य विधानसभाओं के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ,राज्य विधान परिषदों के सभापति एवं उपसभापति, उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, नियंत्रक महालेखा परीक्षक आदि के वेतन एवं भक्तों का विवरण दिया गया है।

तीसरी अनुसूची

इस अनुसूची में संवैधानिक पदों के लिए पद एवं गोपनीयता के शपथ का प्रारूप है।

विभिन्न पदों के लिए शपथ हेतु भिन्न-भिन्न प्रारूप के कारण निम्नलिखित है:-

संविधान के द्वारा विभिन्न संवैधानिक पदों को भिन्न-भिन्न दायित्व सौंप गए हैं। अतः उन्हें विभिन्न प्रारूपण में शपथ लेने की आवश्यकता पड़ती है।

उदाहरण के लिए:-

राष्ट्रपति को संविधान के परिक्षण(Preserve) संरक्षण,(Conserve) और प्रतिरक्षण (Defend )का उत्तरदायित्व होता है ,जबकि संघ के मंत्रियों को संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा तथा भारत की प्रभुता और अखंडता को अशुद्ध बनाए रखने की शपथ लेनी होती है।

कुछ वैधानिक अधिकारियों के पास जैसे राष्ट्रपति, राज्यपाल ,तथा संघ एवं राज्य के मंत्रियों के पास राज्य के बारे में गोपनीय जानकारियां होती हैं। इसलिए उन्हें पद के शपथ के साथ-साथ गोपनीयता के भी शपथ लेनी पड़ती है।

संविधान के द्वारा एक वरीयता क्रम सृजित किया गया है। इस वरियता क्रम में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल के लिए शपथ का प्रारूप मुख्य संविधान में शामिल किया गया है, जबकि अन्य पदों के लिए यह अनुसूची में दिया गया है।

 चौथी अनुसूची

इस अनुसूची में राज्यसभा में विभिन्न राज्यों के सीटों का बंटवारा किया गया है।

पांचवी अनुसूची 

इस अनुसूची में अनुसूचित क्षेत्र और अनुसूचित जातियों के प्रशासन एवं नियंत्रण से संबंधित उपबंध किए गए हैं।

छठी अनुसूची

इस अनुसूची में असम मेघालय त्रिपुरा मिजोरम के प्रशासन से संबंधित उपबंध के बारे में विवरण दिया गया है।

सातवीं अनुसूची

सातवीं अनुसूची में संघ सूची ,राज्य सूची और समवर्ती सूची में शामिल विषयों का उल्लेख किया गया है।

आठवीं अनुसूची

इस अनुसूची में भारत के 22 भाषाओं के बारे में वर्णन किया गया है।

 नौवीं अनुसूची

नवी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले अनुच्छेदों में कानून न्यायिक समीक्षा के दायरे से अलग रखा गया है। इसमें मुख्यतः भूमि सुधारो एवं अधिग्रहण से संबंधित कानून का विवरण दिया गया है।

 दशवीं अनुसूची

इस अनुसूची में दल बादल से संबंधित प्रावधानों का विवरण दिया गया है।

11वीं अनुसूची

11वीं अनुसूची के आधार पर पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया गया।

 बारहवीं अनुसूची

12वीं अनुसूची के आधार पर शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को पंचायती राज व्यवस्था की तरह ही संवैधानिक दर्जा दिया गया है।

bharat ke sanvidhan nirman ki prakriya ko samjhaie

FAQ:- पोस्ट से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

(1). भारतीय संविधान निर्माण की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर:-भारतीय संविधान निर्माण में संविधान सभा के सभी 389 सदस्यों के द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है। यह संविधान 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा के द्वारा पारित हुआ ,और 26 जनवरी 1950 को लागू कर दिया गया था। इस संविधान में सर्वाधिक प्रभाव भारत शासन अधिनियम 1935 का है। भारत शासन अधिनियम 1935 में से लगभग 250 अनुच्छेदों को थोड़ा-बहुत परिवर्तनों के साथ शामिल किया गया है।

(2). संविधान सभा का निर्माण कैसे किया गया था?

उत्तर:-संविधान सभा का निर्माण कैबिनेट मिशन योजना के तहत हुआ था। इसके लिए जुलाई 1946 में चुनाव किए गए थे ।जब 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई थी ,तो मुस्लिम लीग के द्वारा इस बैठक का बहिष्कार किया गया था, और अलग पाकिस्तान बनाने की मांग पर बल दिया गया था।

(3). संविधान के निर्माण प्रक्रिया कब शुरू हुई थी?

संविधान सभा का गठन 6 दिसंबर 1946 को हुई। इसकी पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई। यह सभा जनसाधारण द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों का एक निकाय थी,‌ जो संविधान का मसौदा तैयार करने हेतु या अपनाने के उद्देश्य से इकट्ठे हुए थे।

(4). भारत के संविधान की क्या विशेषता है?

भारतीय संविधान को कठोर और लचीले में वर्गीकृत कर सकते हैं भारतीय संविधान ना तो ज्यादा कठोर है और नहीं ज्यादा लचीलापन या कठोर और लचीला दोनों का मिश्रण है। संविधान को उसकी संशोधन प्रक्रिया के आधार पर कठोर या लचीला कहा जा सकता है। संविधान की एक और विशेषता यह है कि या समय के अनुसार एकात्मक और संघात्मक में परिवर्तित होते रहता है।

(5). संविधान सभा की पहली महिला कौन थी?

उत्तर:-संविधान सभा में कुल 15 महिलाएं शामिल थी। भारतीय संविधान के निर्माण में उनका योगदान समान रूप से महत्वपूर्ण है ।संविधान सभा की पहली महिला अम्मू स्वामीनाथन थी।

(6). भारतीय संविधान में कुल कितने भाग हैं?

भारतीय संविधान में कुल 22 भाग 395 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां हैं।

(7). भारतीय संविधान का क्या महत्व है?

उत्तर:-भारत देश के शासन व्यवस्था को नियंत्रित करने हेतु संविधान का निर्माण किया गया है। साथ ही यह एक गणतंत्र राष्ट्र का आधार भी है। देश के प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए नियमों का निर्माण संविधान के द्वारा ही किया जाता है ।संविधान के अनुसार मूल शक्ति प्रत्येक राष्ट्र की जनता में निहित रहती है, ताकि कोई भी व्यक्ति सत्ता तक न पहुंचे।

(8). संविधान का मुख्य कार्य क्या है?

उत्तर:-किसी भी देश का मौलिक कानून संविधान ही होता है, जो सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा और मुख्य कार्यों का निर्धारण करता है। देश के बाकी सभी कानून और रीति रिवाज को वैध होने के लिए इसका पालन करना पड़ता है।

(9). संविधान सभा में कितने सदस्य हैं?

उत्तर:-संविधान सभा में सदस्यों की संख्या 389 थी। इसमें से 292 प्रांतों के प्रतिनिधि, 93 रियासतों के प्रतिनिधि और 4 दिल्ली, अजमेर, निर्माण कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान के मुख्य आयुक्त प्रांतों से शामिल थे।

(10). संविधान निर्माण की प्रक्रिया में कुल कितना समय लगा था?

भारतीय संविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन का समय लगा था। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा के द्वारा संविधान को अंगीकृत कर लिया गया था, और 26 जनवरी 1950 को संपूर्ण भारत पर लागू कर दिया गया था।

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अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।💐💐

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