Chhath Puja kyu manaya jata hai: छठ पूजा क्यों मनाया जाता है

इस वर्ष छठ महापर्व की पूजा की शुरुआत आज से हो चुकी है।आज यानी की 17 नवंबर 2023 को छठ पूजा का पहला दिन नहाए खाए हैं। यह पर्व बहुत ही महान पर्व माना जाता है। यदि आप जानना चाहते हैं कि Chhath Puja kyu manaya jata hai है, तो आप इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

इस छठ पूजा का पहला अर्ध्य 19 नवंबर तथा दूसरा अर्ध्य 20 नवंबर को दिया जाएगा।

आइए अब जानते हैं कि छठ महापर्व क्यों मनाया जाता है? इसका इतिहास क्या है? इस पर्व का क्या महत्व है? इस पोस्ट में इन सभी प्रश्नों का विस्तृत उत्तर दिया गया है। इसलिए पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

Chhath Puja 2023 date

छठ पूजा का त्यौहार चार दिवसीय होता है। पहला दिन नहाए-खाए, दूसरा दिन खरना किया जाता है। इस पर्व के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य तथा चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

इस वर्ष 17 नवंबर को नहाए-खाए, 18 नवंबर को खरना ,19 नवंबर को संध्या अर्घ्य ,20 नवंबर को उषा अर्ध्य तथा पारण और प्रसाद वितरण किया जाएगा।

छठ महापर्व को लोग बहुत ही धूमधाम के साथ मनाते हैं। छठ पूजा जिसे सूर्य षष्ठी ,छठ,छठ पर्व , डाला छठ पूजा, प्रतिहार और डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है।

यह पर्व भगवान सूर्य को समर्पित है। वेदों में सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन शक्ति के देवता माना गया है। महिलाएं छठ के दौरान कठोर व्रत रखती हैं।

अपने परिवार और बच्चों के भलाई, घर में सुख शांति समृद्धि ,अपनी सुहाग की लंबी आयु तथा घर परिवार पर छठी मैया का आशीर्वाद हमेशा बने रहने की कामना के साथ इस पर्व को बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ किया जाता है।

व्रती भगवान सूर्य और छठी मैया से प्रार्थना करते हैं। वह भगवान सूर्य और छठी मैया को अर्घ्य भी अर्पित करते हैं। यह त्यौहार भारत और नेपाल में बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश आदि क्षेत्रों में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

छठ महापर्व दीपावली के 6 दिनों के पश्चात या कार्तिक महीने के छठे दिन मनाई जाती है। भक्तगण दिवाली के 1 दिन बाद केवल सात्विक भोजन बिना प्याज लहसुन का बना हुआ तथा अत्यधिक स्वच्छता के साथ ध्यान रखते हुए तैयार करते हैं।

स्नान करने के पश्चात खाने से छठ की तैयारी शुरू हो जाती है। इस वर्ष छठ पूजा की शुरुआत 17 नवंबर दिन शुक्रवार से हो रही है। इसका समापन 20 नवंबर सोमवार को हो जाएगा।छठ महापर्व कठोर रीति रिवाज और नियमों के पालन करते हुए किया जाता है।

छठ पूजा का इतिहास

छठ महापर्व की उत्पत्ति से जुड़ी हुई कई सारी पौराणिक कथाएं हैं। कुछ का उल्लेख ऋग्वेद वेद में भी मिलता है।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार द्रौपदी और पांडव अपने राज्य को पुनः प्राप्त करने और अपनी समस्याओं को हल करने के लिए छठ महापर्व का व्रत रखा था।

एक अन्य मान्यता है कि कर्ण, जो भगवान सूर्य और कुंती के पुत्र थे। वह भी छठ पूजा करते थे। कहा जाता है कि कर्ण ने महाभारत काल में जल में कई घंटे तक खड़े होकर सूर्य देव की उपासना किया करते थे।

छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा के दौरान भगवान सूर्य और छठी मैया से आशीर्वाद पानी के लिए महिलाएं 36 घंटे तक उपवास रखती हैं। इस पर्व को पुरुष भी करते हैं। इस पूजा के पहले दिन नहाय-खाए होता है।

इस दिन भक्त गण गंगा नदी जैसे पवित्र जल में स्नान करते हैं। छठ का पालन करने वाले व्रती निर्जला व्रत रखकर भगवान सूर्य के लिए प्रसाद तैयार करते हैं। दूसरे और तीसरे दिन को खरना तथा छठ पूजा कहा जाता है।

इन दिनों मे कठिन निर्जला व्रत रखा जाता है। इसके साथ ही चौथे दिन यानी सूर्योदय के समय पानी में खड़े होकर व्रती उगते हुए सूर्य को अर्ध अर्पित करते हैं। इसके पश्चात अपना 36 घंटे का उपवास छठ पूजा का प्रसाद ग्रहण कर तोड़ते हैं। अपने परिवार के सदस्यों तथा आसपास के अन्य लोगों को भी प्रसाद वितरित करते हैं।

FAQ:- पोस्ट से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

 (1).छठ पूजा मनाने का क्या कारण है?

उत्तर:- कहा जाता है कि छठ पर्व को सर्वप्रथम सूर्यपुत्र कर्ण के द्वारा सूर्य की पूजा उपासना के साथ शुरू किया गया था। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। वह प्रतिदिन घंटे तक पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्ध देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने। आज के समय में भी छठ में अर्ध्य की यह परंपरा प्रचलित है।

(2).पूजा का इतिहास क्या है?

उत्तर:- व्रत के संबंध में अनेक कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राज पाठ जुए में हार गए थे। तब श्री कृष्ण द्वारा कहे जाने पर द्रौपदी ने छठ व्रत किया था। तब उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हुई और पांडवों को पुनः उनका राज पाठ प्राप्त हो गया। लोक परंपरा के अनुसार सूर्य देव और छठी मैया का संबंध भाई-बहन के संबंध जैसा मानते हैं।

(3).छठ पूजा नहाए खाए कब है?

उत्तर:- 17 नवंबर 2023 को छठ पूजा का पहला दिन नहाए खाए है। इस दिन व्रती कद्दू चना का सब्जी और चावल सेंधा नमक और शुद्ध घी में बनाकर ग्रहण करते हैं।

(4).2023 में छठ पूजा कब है?

उत्तर:- इस वर्ष छठ पूजा की शुरुआत 17 नवंबर दिन शुक्रवार नहाए-खाए से हो रही है। 18 नवंबर को खरना किया जाएगा। 19 नवंबर को पहला सूर्य अर्घ्य ,20 नवंबर को दूसरा सूर्य अर्ध्य किया जाएगा। इसी के साथ छठ पूजा का समापन हो जाएगा।

(5).2023 में किस राज्य में मनाई जाएगी?

उत्तर:- पूजा मुख्य रूप से बिहार उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश झारखंड पश्चिम बंगाल तथा नेपाल के कुछ भागों में मनाई जाती है इसका सबसे अधिक प्रचलन बिहार राज्य में है।

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