Diwali essay in hindi: दीपावली पर निबंध – कक्षा 1से कक्षा 12 तक के बच्चों के लिए

दोस्तों, Diwali essay in hindi पोस्ट में कक्षा 1 से कक्षा 12 तक के बच्चों के लिए दीवाली पर निबंध दिए गए हैं। इस पोस्ट को पढ़ने के पश्चात आपको दिवाली से संबंधित सारी जानकारियां प्राप्त हो जाएगी इसलिए इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

Diwali essay in hindi

दिवाली का त्यौहार भारत में मनाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण त्योहार में से एक है।यह त्योहार प्रत्येक वर्ष केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर के भारतीय समुदायों के द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

दीपावली शब्द का अर्थ दीपों की श्रृंखला होता है। यह शब्द “दीप” और “आवली” के संयोग से बना है, जिसे संस्कृत भाषा के शब्दों से लिया गया है। दिवाली को दीवाली या दीपावली भी कहा जाता है।

दिवाली का त्योहार प्रत्येक घरों में खुशियों की सौगात लेकर आता है, और इस दिन हर घर में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी जी के पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है।

वैसे तो दिवाली का त्योहार 5 दिनों तक चलने वाला होता है, जहां हर एक दिन का अलग-अलग महत्व होता है, लेकिन आमतौर पर यह सबसे ज्यादा दो दिनों तक खास रहता है- छोटी दीवाली और दिवाली 

सामान्यतः दिवाली का त्योहार अक्टूबर महीने के मध्य से नवंबर के मध्य में पड़ता है। यह कार्तिक मास के 15 वें दिन अमावस्या को मनाई जाती है। इस वर्ष की दीपावली त्यौहार के डेट की बात की जाए तो इस बार 12 नवंबर को मनाई जाएगी।

Diwali Essay in English 10 lines

Line 1.दिवाली के त्यौहार को रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है।

Line 2.कई भारतीय संस्कृतियों के अनुसार दिवाली के त्योहार को नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

Line 3.दिवाली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान श्री राम, रावण पर विजय पाकर 14 वर्षों का वनवास पूरा होने के पश्चात वापस घर लौटे थे।

Line 4.इसी दिन अयोध्या वासियों के द्वारा अपने प्रभु श्री राम के लौटने की खुशी के शुभ अवसर पर अपने घरों और पूरे शहर को दीपों से सजाया था।

Line 5.दिवाली पर सभी लोग अपने घरों को साफ करते हैं, फूलों से सजाते हैं, रंगोली बनाते हैं, एवं दीप जलाकर अपने घरों को प्रकाशित करते हैं ,जिससे इस दिन चारों तरफ रात्रि में दीपों की रोशनी दिखाई देती है।

Line-6 पड़ोसी, दोस्त, रिश्तेदार सभी एक दूसरे के साथ मिलकर यह त्यौहार मनाते हैं, एवं उपहार तथा मिठाइयों का आदान-प्रदान करते हैं।

Line -7 दिवाली की रात को प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी जी की पूजा-आराधना की जाती है।

Line- 8.दीपावली का त्योहार 5 दिनों तक चलता है। इन पांच दिनों में सभी दिन का अलग-अलग महत्व होता है।

Line-9.दिवाली से 1 दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है।

Line-10.दिवाली सिर्फ एक त्यौहार ही नहीं बल्कि अंधकार पर रोशनी की जीत या यूं कहे तो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

Diwali Essay in Hindi in 200 words

दीपावली का त्यौहार हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार है।इस पर्व को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। आमतौर पर दिवाली का त्योहार अक्टूबर महीने और नवंबर महीने के बीच आता है।

इसी दिन श्री राम जी, लंकापति रावण को हराने के पश्चात अपनी नगरी अयोध्या वापस आए थे। भगवान राम के घर वापस आने की खुशी में अयोध्या वासियों के द्वारा इस दिन पूरे अयोध्या को दीपों से सजाया गया था, तभी से यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष मनाए जा रहे हैं। 

दीवाली का त्योहार पांच दिवसीय होता है। इस त्यौहार के आने से पहले सभी लोगों के द्वारा अपने घरों में साफ-सफाई किया जाता है, तथा घर के प्रत्येक कोने में दीप जलाए जाते हैं, और फूलों तथा रंगीन रंगोलियों से सजाया जाता है।

दीपावली के दिन लोगों के द्वारा उपहार का आदान-प्रदान किया जाता है, एवं शुभकामनाएं दी जाती है। इस त्यौहार को सुख शांति समृद्धि का त्यौहार भी माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना करने की परंपरा रही है।

 इस दिन अपने घरों में लोग रंगीन मिट्टी के दीए जलाते हैं, जो प्रकाश और आशा की विजय का संदेश देता है। यूं कहा जाए तो कई दशकों से दीपावली के दिन पटाखे और आतिशबाजियों के साथ इस पर्व को मनाया जाता है।

लेकिन 21वीं सदी में उनके पर्यावरण और स्वास्थ्य प्रभाव के बारे में चिंताएं दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। इसलिए हम सभी को अपने पर्यावरण की स्वच्छता का ध्यान रखते हुए इस दिन विषैले पटाखे और आतिशबाजियों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

Long Essay on Diwali in Hindi /600 Words Diwali essay in Hindi (प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण अनुकूल दीपावली)

दीवाली का त्यौहार भारत में मनाए जाने वाले सबसे प्रसिद्ध और शुभ त्योहारों में से एक माना जाता है। इस त्यौहार को रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है। इस पर्व को अंधकार पर प्रकाश की जीत और बुराई पर अच्छाई की जीत, अज्ञान पर ज्ञान की तथा निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक माना जाता है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है। यह अक्टूबर के मध्य से नवंबर के मध्य के बीच होता है।

दिवाली शब्द संस्कृत के शब्द दीपावली से बना हुआ है। इसका अर्थ दीपों की पंक्ति होता है। यह त्यौहार हिंदू वर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। इस त्यौहार के दिन लोगों के द्वारा अपने घरों को सजाया जाता है, घर के कोने-कोने में दीप जलाए जाते हैं, तथा फूलों और रंगीन रंगोलियों से सजाया जाता है।

दिवाली का त्यौहार केवल भारत में ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व भर में बसे हुए हिंदुओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। इन सभी के द्वारा हर वर्ष की भांति प्रत्येक वर्ष हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। दिवाली के त्यौहार को खुशियों का त्यौहार या सुख- शांति-समृद्धि का त्योहार भी कहा जाता है।

दिवाली के त्यौहार मनाने के पीछे कई कथन है। भगवान श्री राम जी लंका नरेश रावण पर विजय पाने और 14 वर्ष की वनवास पूरा कर लेने के पश्चात इस दिन वापस अयोध्या लौटे थे।

इस खुशी के शुभ अवसर पर अयोध्या वासियों के द्वारा अपने घरों को फूलों और दीपों से सजाया गया था,और खुशी मनाई गई थी। तभी से यह पर्व मनाया जाने लगा है।

दिवाली के त्यौहार मनाए जाने के पीछे एक और कथन यह है, कि इस पर्व को मना कर धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी का सम्मान किया जाता है। इन्हें अपने घरों में निवास करने हेतु पूजा के द्वारा आमंत्रित किया जाता है।

इस दिन धन और सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए प्रथम पूज्य गणेश और माता लक्ष्मी का पूजा-अर्चना श्रद्धा भाव के साथ की जाती है।

दीपावली का त्यौहार संपूर्ण भारत में बड़े उत्साह और खुशी के साथ मनाई जाने वाली त्यौहार है। सभी लोगों के द्वारा इस त्यौहार के एक दो हफ्ते पहले से ही अपने घरों की साफ-सफाई करना शुरू कर देते हैं।

साफ-सफाई के पश्चात घरों को रोशनी और रंगोलियों से सजाते हैं। नए कपड़े खरीदते हैं। इस पर्व की रात्रि को अपने घरों और कार्यालयों के चारों ओर दिए और मोमबत्तियां जलाकर प्रकाशमान करते हैं।

इस दिन धन और सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए विघ्नहर्ता श्री गणेश और धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के पश्चात लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ उपहार लेन-देन करते हैं। और एक दूसरे को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं देते हैं। 

इस दिन लोग अपने घरों में स्वादिष्ट भोजन और मिठाइयां भी बनाते हैं, तथा उन्हें अपने प्रिय जनों के साथ बांटकर खाते हैं।

 यह त्योहार परिवार और दोस्तों को एक साथ मिलने और जश्न मनाने का त्यौहार है। इस दिन सभी अपने गीले-सिकवे भूल कर एक नई शुरुआत करते हैं।

दिवाली का पर्व आनंद और खुशियां फैलाने वाला पर्व है। इस अवसर पर समृद्ध घर परिवार के लोग दान भी करते हैं, तथा जरूरतमंदों की सहायता करते हैं।

उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में दीपावली उत्सव के पर्यावरणीय प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ रही है। लोग अब त्योहार मनाने हेतु पर्यावरण अनुकूल तरीकों का उपयोग करने के बारे में अधिक जागरूक हो रहे हैं। पर्यावरण अनुकूल दीपावली जिसे हरित दीपावली के नाम से भी जाना जाता है।

दिवाली के त्यौहार मनाने के लिए पर्यावरण के प्रति जागरूक दृष्टिकोण होना बहुत जरूरी है, क्योंकि इस दिन बहुतों के द्वारा पटाखे और आतिशबाजियां जलाए जाते हैं, जो हमारे पर्यावरण को दूषित करता है।

हमारे पर्यावरण पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे न केवल पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है, बल्कि पर्यावरण के प्रदूषित होने से जानवरों, पौधों और मनुष्यों को भी नुकसान होता है।

वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागरूक होने के कारण पर्यावरण अनुकूल आतिशबाजियां जलाते हैं ,जो कि कम प्रदूषण और सोर पैदा करने वाली होती है।

इस समय कम प्रदूषण और सोर पैदा करने वाली आतिशबाजियों का प्रचलन बढ़ रहा है। यह आतिशबाजियां प्राकृतिक सामग्रियों और जैविक बायोडिग्रेडेबल सजावट से बने रंगोली डिजाइन एक स्वच्छ और अधिक टिकाऊ उत्सव में योगदान देने वाले होते हैं।

ऐसे आतिशबाजियों को जलाकर हम अपने पर्यावरण अधिक प्रदूषित होने से रोक सकते हैं, और इससे ध्वनि प्रदूषण में भी कमी आएगी। इन आतिशबाजियों को अधिक जिम्मेदार और सामंजस्यपूर्ण तरीके से बढ़ावा देना चाहिए।

1000 Words Diwali essay in Hindi

Diwali essay in hindi

दिवाली का त्यौहार हिंदुओं के प्रसिद्ध त्योहार में से एक माना जाता है। यह त्योहार पूरे भारत में पूरे हर्षोल्लास  के साथ मनाया जाता है।इस पर्व को दीपावली या दीवाली भी कहा जाता है।

दीपावली दो शब्दों (दीप+वाली) के संयोग से बना है। इसका अर्थ दीपों या दीयों की एक पंक्ति या श्रृंखला होता है।

दिवाली ,केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी रहने वाले हिंदुओं और अन्य गैर हिंदू समुदायों के द्वारा भी मनाई जाती है। हिंदू के अलावा जैन नेवर बौद्ध और सिख आदि हिंदू समुदाय के द्वारा भी दिवाली मनाए जाते हैं।

दिवाली अक्टूबर या नवंबर के महीने में आती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार दिवाली कार्तिक माह में अमावस्या की अंधेरी रात्रि को पड़ती है।

यह त्यौहार धर्म, संस्कृतियों और परंपराओं से जुड़ा हुआ है। दिवाली के दिन भगवान राम 14 वर्षों के वनवास काटने के पश्चात अपने घर अयोध्या वापस आए थे।

वह अपनी पत्नी देवी सीता और भाई लक्ष्मण तथा हनुमान जी के साथ राक्षस रावण हराने के बाद आए थे। इस दिन अयोध्या वासियों के द्वारा श्रीराम के आने के खुशी के अवसर पर पूरे अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया था, और दीपों से अंधेरी रात को प्रकाशमान कर दिया था। तभी से यह त्यौहार मनाया जाता रहा है।

इस दिन अयोध्या वासी अपने प्रिय राजकुमार राम, उनकी पत्नी सीता तथा उनके भाई लक्ष्मण और हनुमान जी के साथ मिट्टी के दीए जलाकर और पटाखे फोड़ कर उनका स्वागत किया तथा खुशियां मनाई थी।

इस दिन पूरा अयोध्या झूम उठा था। इस दिन पूरी अयोध्या को मिट्टी के दिए और फूलों से सजाया और रोशन कर अंधकार को मिटाया गया था ।इस पर्व को अंधकार पर प्रकाश का जीत और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक भी माना जाता है।

 दीवाली त्योहार के बारे में एक और किंवदंती यह है, कि देवी लक्ष्मी का भगवान विष्णु से विवाह हुआ है। इसी दिन देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पति रूप में स्वीकार कर उनसे विवाह संपन्न किया।

मां देवी लक्ष्मी को धन और समृद्धि देने के लिए जाना जाता है। इसलिए इस दिन इनकी पूजा-अर्चना बहुत ही श्रद्धा-भाव के साथ किया जाता है।

 यह त्यौहार न केवल हिंदुओं के द्वारा मनाया जाता है, बल्कि अन्य धर्म के लोगों द्वारा भी इस पर्व को खुशी के साथ मनाया जाता है। 

जैसे:-

सिख लोग मुगल सम्राट जहांगीर की जेल से गुरु गोविंद सिंह की रिहाई दिवाली के दिन ही हुई थी। इसलिए गुरु गोविंद सिंह की रिहाई के याद में सिखों के द्वारा दिवाली पर्व मनाया जाता है।

जैन धर्म में ‘महावीर निर्वाण दिवस ‘ महावीर की शारीरिक मृत्यु और अंतिम मुक्ति के दिन के रूप में दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है।

नेवार बौद्ध धर्म में मां देवी लक्ष्मी की पूजा करके दिवाली का पर्व मनाई जाती है।

दिवाली मनाने के बारे में एक और किंवदंती यह है कि भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण के द्वारा राक्षस नरकासुर का वध कर, नरकासुर के द्वारा बंदी बनाई गई 16000 लड़कियों को रहा कराया था। जिस दिन को भगवान श्री कृष्ण के द्वारा नरकासुर का वध किया गया था वह दिवाली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।

दीपावली के शुभ अवसर पर लोग  विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा कर अपने जीवन में आए संकटों को दूर करके सौभाग्य की प्राप्ति करने की कामना करते हैं।

सेठ-व्यापारियों के लिए यह त्यौहार बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। सेठ-व्यापारी दीपावली के दिन अपने नए खाता खोलते हैं, और धन की लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की आशीर्वाद पाने हेतु अपने कार्य स्थल पर इनकी पूजा-अर्चना करते हैं।

दिवाली यह ऐसा त्यौहार है, जिसकी तैयारी 1 महीने पहले से ही घरों की साफ-सफाई, सफेदी, मरम्मत और सजावट का काम करना शुरू हो जाती है।

इस दिन लोग दोस्तों, परिवार और अपने प्रिय जनों के साथ मिठाई और उपहार का आदान-प्रदान करते हैं। इस दिन लोग खूब शॉपिंग करके बाजारों में भी इंजॉय करते हैं।

वह अपने घर और प्रिय जनों के लिए नए कपड़े, फर्नीचर और अन्य सजावटी सामान खरीदते हैं, और अपने घरों को अच्छे से सजाते हैं।

दिवाली के दिन लोग और बच्चे नए-नए कपड़े पहन कर खुशी महसूस करते हैं ,और पटाखे फोड़ कर त्यौहार मनाते हैं।

यह त्यौहार 5 दिनों तक चलता है। भारत में दिवाली के दिन अवकाश रहता है।

इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है।धनतेरस के दिन लोग बर्तन, सोना, चांदी अन्य धातु में उपकरण और ऑटोमोबाइल खरीदते हैं।

नई खरीदारी करने के लिए यह शुभ दिन माना जाता है। कीमती धातु के रूप में नया धन सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस का त्यौहार दिवाली के ठीक 2 दिन पहले मनाया जाता है।

दिवाली से 1 दिन पहले छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण के द्वारा नरक चतुर्दशी के दिन ही राक्षस नरकासुर का वध करके उसके द्वारा बंदी बनाई गई 16000 कन्याओं को रिहाई दिलाई थी।

छोटी दीवाली पर लोग अकाल मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज की पूजा अर्चना करते हैं, और रात में दीपक जलाते हैं।

तीसरे दिन दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है। दिवाली को अंधकार पर प्रकाश की जीत और अज्ञान पर ज्ञान की जीत तथा अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन लोग अपने घरों को बिजली की रोशनी, मिट्टी के दीपों तथा रंगीन मोमबत्तियां और सुंदर फूलों से सजाकर खूबसूरत बनाते हैं। मां देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए लोग अपने घरों के सामने फूलों, आटे और रंगीन पाउडर से भी कलात्मक तरीके से रंगोलियां  बनाते हैं।

इस दिन की रात्रि में पूजन के शुभ मुहूर्त के अनुसार मां देवी लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश के पूजा-अर्चना कर प्रसाद बांटते हैं, और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां खाते हैं।

दिवाली के दिन लोगों और बच्चों के द्वारा पटाखे और आतिशबाजियां जलाकर खुशियां मनाई जाती है। इस दिन बच्चे बहुत ही आनंद में होते हैं, लेकिन हमें इस दिन हरित दिवाली मनाने के लिए बच्चों को और लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

हमें विषैले पटाखे जलाकर अपने वातावरण को प्रदूषित नहीं करना चाहिए।

इस पर्व के चौथे दिन को विश्वकर्मा दिवस या गोवर्धन पूजा के नाम से जाना जाता है। विश्वकर्मा एक हिंदू देवता हैं। वास्तु कला, भवन निर्माण, कपड़ा कार्य और शिल्प व्यापार से जुड़े हुए लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करते हैं।

इस दिन व्यापार के औजारों, मशीनों, कार्यालयों और कार्य स्थलों को साफ-सफाई कर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है ,क्योंकि यह सभी औजार आजीविका के हथियार होते हैं।

इस पर्व का अंतिम दिन भैया दूज या भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार बहन-भाई के बंधन का जश्न होता है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण नरकासुर को हराने के पश्चात अपनी बहन सुभद्रा के घर आए थे। सुभद्रा अपने भाई भगवान श्री कृष्ण के माथे पर तिलक लगाकर उनका स्वागत की थी।

एक अन्य पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यम की बहन यमुना अपने भाई का स्वागत इस दिन माथे पर तिलक लगाकर करती है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए अनुष्ठान और प्रार्थना करती हैं ,कि उनका भाई हमेशा सुखी संपन्न और स्वस्थ रहे। भाई भी अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं। वे अपनी बहनों को उपहार भी प्रदान करते हैं।

दिवाली का काफी अधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। यह लोगों के बीच सद्भाव,एकता, एकजुट और भाईचारा बढ़ाने का काम करता है।

इस त्यौहार में लोग अपने विवादों को भूलकर एक साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं। इस‌ दिन अपने दिल के सारे नकारात्मकता को दूर कर इस त्यौहार का आनंद उठाते हैं।

यह त्योहार हमारे जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर एक सकारात्मक ऊर्जा का हमारे जीवन में संचार करता है।

दिवाली का पर्व बहुत ही धूमधाम से संपूर्ण भारत में मनाई जाती है। यह हमें जीवन के कई नैतिक मूल्यों के बारे में भी सीख प्रदान करता है। राम का अपने माता-पिता के प्रति आज्ञा पालन का भाव, त्याग और वैराग्य, पिता के वचनों को पूरा करने के लिए महल में आरामदायक जीवन जीना भी छोड़ देना इत्यादि।

माता सीता की निष्ठा, उनका संघर्ष और दृढ़ इच्छा शक्ति तथा अपने पति पर विश्वास को भी दर्शाता है। लक्ष्मण का अपने भाई के प्रति निस्वार्थ प्रेम और बलिदान की भी सिख प्रदान करता है। सभी बाधाओं के बावजूद भगवान राम के प्रति हनुमान जी की निष्ठा।

इन सभी बातों से हमें यह सीख मिलता है, कि एक न एक दिन बुराई पर अच्छाई की जीत अवश्य होती है। इसीलिए दिवाली के पर्व को अंधकार पर प्रकाश की जीत, अज्ञान पर ज्ञान की जीत, अधर्म पर धर्म की जीत तथा बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक माना जाता है।

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