Diwali par nibandh in hindi | दीपावली पर निबंध हिंदी में Class 1 से 10 तक के लिए यहाँ देखें

 🎇🪔 Diwali par nibandh in hindi:  दोस्तों दिवाली का त्योहार हिंदुओं के प्रसिद्ध त्योहार में से एक है। दीपावली का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। बुराई चाहे बलवान और बुद्धिमान, रावण जैसा ही क्यों न हो उसका एक न एक दिन अंत हो ही जाता है।
इसलिए हमें बुराई के पथ पर नहीं जाना चाहिए चाहे फिर हमारे पास ताकत कितनी भी क्यों ना हो ।इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि झूठ कुछ समय के लिए जीत सकता है, पर अंतिम जीत सच्चाई की ही होती है ।

एक मान्यता है कि अयोध्या वासियों के द्वारा दशरथ नंदन राम के आगमन की खुशी में धूमधाम और हर्षोल्लास  के साथ अपने घरों में सजावट और दीप जलाए थे। तभी से यह दीपावली का त्यौहार मनाया जाता रहा है जो कि आज भी हिंदू समाज में बड़े ही खुशी के साथ प्रत्येक वर्ष सेलिब्रेट किया जाता है।

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प्रस्तावना (Introduction)

दीपावली का त्यौहार हिंदुओं के सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण त्योहार में से एक माना जाता है। इस पर्व को छोटे बच्चों से बड़ों तक बहुत ही उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

युवाओं के लिए यह त्यौहार बहुत ही खुशनुमा होता है, क्योंकि इस दिन यह अपने परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों से मिलते हैं, तथा प्रिय जनों के साथ शुभकामनाएं और कुछ उपहारों का आदान-प्रदान भी करते हैं।

इस दिन दोस्तों एक दूसरे को कुछ गिफ्ट भी देते हैं। मिलकर सभी पटाखे और दिए जलाते हैं ,रोशनी के समक्ष सभी मौज मस्ती करते हुए आनंद उठाते हैं। इस दिन की रात बहुत ही खुशियों से भरा और यादगार बन जाता है।

आपकी जानकारी के लिए मैं बता दूं कि इस वर्ष 2023 में दीपावली का पर्व 12 नवंबर 2023 को मनाया जाएगा। मालूम होगी कि इस दिन विशेष रूप से धन प्रदान करने वाली माता लक्ष्मी की पूजा बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ की जाती है।

इस दिन घरों के साथ-साथ माता के मंदिरों में भी दीपक जलाए जाते और पूजा की जाती है। दीपावली के रात सभी घरों में बहुत सारे दिए जलाए जाते हैं यह पल बहुत ही खुशनुमा होता है।

 दीपावली पूजा शुभ मुहूर्त (Deepawli puja shubh muhurt) के बारे में 

दिवाली के पावन अवसर पर धन की देवी माता लक्ष्मी, विघ्नहर्ता, सुख-समृद्धि दाता गणेश जी व कुबेर जी की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन माता लक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल में करने को सर्वाधिक फलदायक माना जाता है।

मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में माता लक्ष्मी का पूजन करना विशेष फलदायक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि स्थिर लग्न में की गई अपनी पूजा-आराधना से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी आराधक के घर में निवास स्थान बना लेती हैं।

इस वर्ष 2023 में दिपावली के अवसर पर 12 नवंबर को लक्ष्मी पूजन का शूभ मुहूर्त गृहस्थ जनों के लिए सायंकाल 05:41 मिनट से रात 07:37 मिनट तक है। इस बार धन की देवी लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त का कुल अवधि लगभग 01 घंटे 55 मिनट ही रहेगी। 

दीपावली का अर्थ

दिवाली को “दीपावली” के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में रहने वाले हिंदुओं के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है।

‘दीपावली’ संस्कृत के दो शब्दों के संयोग से बना है – दीप + आवली । इसमें ‘दीप’ का अर्थ होता है ‘दीपक’ तथा ‘आवली’ का अर्थ होता है ‘श्रृंखला’,। इसका मतलब होता है दीपों की श्रृंखला या दीपों की पंक्ति।

प्रत्येक वर्ष दीपावली का त्योहार कार्तिक मास के अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार दुनिया भर के लोगों द्वारा बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

हालांकि ,इसे हिंदू का त्योहार माना जाता है, परंतु विभिन्न समुदायों के लोग भी इस दिन पटाखे और आतिशबाजी के जरिए इस उज्ज्वल त्योहार को मनाते हैं और खुशियां बांटते हैं।

  दीपों का त्यौहार दिवाली आई है।

             खुशियों का संसार दिवाली आई है।।

घर आंगन सब नया सा लगता है।

             नया नया परिधान सभी को फबता है।।

नए नए उपहार दिवाली लायी है।

             खुशियों का संसार दिवाली लाई है।।

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दीपावली त्योहार की तैयारी

दीवाली त्योहार की तैयारियां सभी के घरों में दिवाली से कई दिनों पहले से ही आरंभ हो जाती है। कई दिनों पहले से ही लोग अपने घरों की साफ-सफाई व रंगाई-पुताई करने लग जाते हैं। लक्ष्मी माता की आगमन के लिए अपने घरों को सजाने लगते हैं।

क्योंकि ऐसी मान्यता है कि जो घर साफ-सुथरे होते हैं, उन घरों में दिवाली के दिन माता लक्ष्मी प्रवेश करतीं हैं, तथा घर पर अपना आशीर्वाद प्रदान करके वहां सुख-समृद्धि में बढ़ोत्तरी करती है।

इसलिए दिवाली के नजदीक आते ही लोग अपने घरों सफाई करते हैं और दीपक तथा तरह-तरह के लाइट्स से सजाना शुरू कर देते हैं। ताकि उनका घर माता लक्ष्मी को पसंद है और उनके घर में अपना निवास स्थान बना कर उन्हें सुख समृद्धि का आशीर्वाद दें।

दिवाली में पटाखों का महत्व

दीपावली को “रोशनी का त्योहार” भी कहा जाता है। इस दिन लोग मिट्टी से बने दीपक जलाते हैं ,और अपने घरों को विभिन्न रंगों और आकारों की रोशनी से सजाकर आकर्षक बनाते हैं, जिसे देखकर कोई भी मंत्रमुग्ध हो सकता है।

इस पर्व के दिन बच्चे बहुत खुश होते हैं क्योंकि इन्हें इस दिन बहुत सारे पटाखे जलाने और विभिन्न तरह के आतिशबाजी जैसे के फुल -झड़िया रॉकेट फव्वारे और चकरी आदि जलाने का अवसर प्राप्त होते हैं।

दिवाली पर्व का इतिहास

Diwali par nibandh in hindi

माना जाता है कि दिवाली के दिन ही भगवान श्री राम 14 वर्षों के वनवास के पश्चात अपनी पत्नी सीता, भाई लक्ष्मण और उनके उत्साही भक्त हनुमान के साथ अयोध्या आए थे।इस दिन अमावस्या की रात होने के कारण काफी अंधेरा छाया हुआ है।

इस लिए उस दिन पुरे अयोध्या को दीपों और फूलों के द्वारा भगवान श्री राम चंद्र के आगमन की खुशी में सजाया गया था, ताकि भगवान राम के आगमन में कोई परेशानी न हो, तभी से लेकर आज भी इसे दीपों का त्योहार और अंधेरे पर प्रकाश की जीत के रूप में मनाया जाता है।

इस  पावन पर्व के शुभ अवसर पर , बाजारों में भगवान गणेश जी, लक्ष्मी जी, राम जी शंकर जी आदि की मूर्तियों की खरीदारी की जाती है। इस दौरान बाजारों में खूब चहल-पहल देखने को मिलती। लोगों के द्वारा इस  अवसर पर नए कपड़े, बर्तन, मिठाइयां, मूर्तियां, खिलौने आदि खरीदे जाते हैं।

 व्यापारीयों के द्वारा दिवाली के पर्व पर नई खाता बही की शुरुआत की जाती हैं। साथ ही, लोगों का यह  मानना है कि यह खूबसूरत त्योहार सभी के जीवन में धन, समृद्धि और सफलता लाता है।

लोग दिवाली के त्योहार के शूभ अवसर पर अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ उपहारों का आदान-प्रदान करने के लिए तत्पर रहते हैं। सभी रिश्तेदार एक दूसरे से मिलते हैं और साथ में खुशियां मनाते हैं।

दीवाली से जुड़ी सामाजिक कुरीतियों के बारे मेंं 

 कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा दीवाली जैसे धार्मिक महत्व वाले पर्व के पावन अवसर पर भी अपने बुरी आदत जैसे शराब का सेवन, जुआ खेलना, टोना-टोटका करना और पटाखों के गलत इस्तेमाल करने जैसे कार्य किए जाते हैं।

हमें इन कुर्तियां को समाप्त करने पर विचार करना चाहिए। यदि यह कुरीतियां हमारे समाज से दूर हो जाती हैं तो हमारा समाज वास्तव में स्वच्छ हो पाएगा और दीपावली का पर्व वास्तव में शुभ दीपावली का पर्व बन पाएगा।

 उपसंहार (Conclusion)

दिवाली का त्योहार स्वयं के अंदर के अंधकार को मिटाकर पुरे संसार को प्रकाशमय बनाने का त्योहार है। बच्चों के द्वारा इस दिन अपनी इच्छानुसार बम, फुल झाड़ियां तथा अन्य पटाखे खरीद कर जलाए जाते हैं। इस दिन बच्चे  आतिशबाजी का भी आनंद उठाते हैं।

हम सभी को इस बात पर गौर फरमाना चाहिए कि दीपावली का त्योहार का अर्थ दीप, प्रेम तथा सुख-समृद्धि संपन्नता से है।इस दिन हमें पटाखों का इस्तेमाल बहुत ही सावधानी पूर्वक और अपने बड़ों के सामने रहकर ही करना चाहिए।

दिवाली का त्योहार हमें यह सीख देता है कि हमें अपने जीवन में हमेशा आगे बढ़ना चाहिए और दूसरों की बुरे हालातो में मदद करनी चाहिए। जैसे कि एक दीपक दूसरों के लिए रोशनी फैला कर रास्ता दिखाता है। 

दीपावली का त्योहार केवल एक त्यौहार नहीं बल्कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक भी है। इस त्योहार के कारण लोगों में आज भी सामाजिक एकता की भावना स्थापित होती है ।

जाने माने प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार गोपालदास नीरज ने भी कहा है,

   “जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना,

              अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।”

इसलिए हम सभी को दीपावली के शुभ अवसर पर प्रेम और सौहार्द को बढ़ावा देने का प्रयत्न करना चाहिए।

दीपावली के साथ मनाए जाने वाले अन्य उत्सव (Celebrations celebrated with Deepawali)के‌ बारे में जाने 

✓दीपावली का त्योहार लगभग 5 दिनों तक चलता है ।इस त्योहार के पहले दिन धनतेरस मनाया जाता है।धनतेरस के दिन लोगों के द्वारा धातु की वस्तुएं जैसे सोने, चांदी तांबे आदि के वस्तुएं खरीदी जाती है। इस दिन झाड़ू खरीदने का भी रिवाज है।

✓दीपावली के दूसरे दिन को नरक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। कुछ लोगों के द्वारा इस दिन को छोटी दिवाली भी कहा जाता है।

✓इस पर्व के तीसरा दिन दीपावली त्योहार का मुख्य दिन होता है। इसी दिन धन की देवी महालक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना भक्ति भाव के साथ की जाती है।

✓इस पर्व के चौथे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसी दिन इंद्र के क्रोध से हुई मूसलाधार वर्षा से गोकुल वासियों को बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी एक उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाया था। इस प्रकार से गोकुल वासियों की प्राणों की रक्षा की थी। तभी से प्रतिवर्ष इस दिन गोवर्धन पूजा की जाती है।

दिवाली के त्योहार के अंतिम दिन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है।

 दिवाली पर निबंध 10 लाइन (essay on diwali 10 lines) लिखें 

(1) दीपावली को दीपों का त्योहार भी कहा जाता है।

(2) दिवाली भारत के सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है।

(3) दिवाली का त्यौहार भगवान राम की याद में मनाया जाता है ,जो चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस आए थे।

(4) इस अवसर पर हिंदू अनुयायीयों के द्वारा मिट्टी के दीपक जलाए जाते है।इस दिन अपने घरों को रंगोली से  भी सजाने का रिवाज़ है।

(5) बच्चे दिवाली के दिन पटाखे जलाकर बहुत खुश होते हैं।

(6) हिंदुओं में इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान भी  संपन्न किए जाते हैं।

(7) बच्चे, बूढ़े और जवान, सभी इस पर्व के  शूभ अवसर पर धन की देवी माता लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना श्रद्धा भाव से करते हैं।

(8) इस त्योहार के दिन अपने दोस्तों और पड़ोसियों को मिठाईयां और उपहार दिए जाते हैं।

(9) भारत में इस दिन सार्वजनिक अवकाश रहता है। इस पर्व के दिन बड़े भी बहुत ही धूमधाम से पूजा अर्चना करते हैं और खुशियां मनाते हैं।

(10) यह त्योहार हिंदुओं के सभी त्योहारों में से लोकप्रिय और आनंददायक त्योहार माना जाता है। इसे अन्य धर्म और संप्रदाय के लोग भी आपस में मिलजुल कर मनाते हैं ,और एक दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं।

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विदेशों में दिपावली का स्वरूप

श्रीलंका

श्रीलंका वासियों के द्वारा दिवाली के त्यौहार के दिन प्रातः काल सुबह उठकर सबसे पहले तेल से स्नान किया जाता है।इस दिन पूजा करने के लिए मंदिरों में जाते है, और दिवाली मनाने के लिए वहां पर विभिन्न प्रकार के खेल, आतिशबाजी, गायन, नृत्य, भोज  आदि का आयोजन भी किया जाता है।

मलेशिया

इस देश में दिवाली के दिन भारत देश के जैसे ही सरकारी अवकाश रखा जाता है, क्योंकि यहाँ पर सबसे अधिक संख्या हिंदुओं की ही है। दिवाली के शुभ अवसर पर लोग अपने घरों में पार्टी करते है और साथ ही इस पार्टी में मलेशिया के नागरिक भी शामिल होते है।

नेपाल

इस देश में दिवाली के पर्व को बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। दिवाली के दिन नेपाल में कुत्तों को सम्मानित किया जाता है ,और उनकी पूजा भी की जाती है । शाम के समय में  यहां के लोग सभी घरों में दीपक भी जलाते हैं, और बधाई देने के लिए एक दूसरे के घरों में जाते है।

इस पोस्ट से संबंधित प्रश्न-उत्तर

(1).दीपावली 2023 पूजा का शुभ मुहूर्त कब है?

उत्तर:- दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में करना सर्वाधिक फलदायक माना जाता है। प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2023 में दिवाली के अवसर पर 12 नवंबर को लक्ष्मी पूजन गृहस्थ जनों के लिए सायंकाल 05:41 मिनट से रात 07:37 मिनट तक का समय बहुत ही शुभ है। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त की कुल अवधि लगभग 01 घंटे 55 मिनट रहेगी।

(2).साल 2023 में दिवाली कब है?

उत्तर:- वर्ष 2023 में दिवाली 12 नवंबर को मनाई जाएगी। 

(3).दिवाली का त्यौहार कैसे मनाया जाता है?

उत्तर:- दिवाली का त्योहार मिट्टी के दीप जलाकर मनाया जाता है। इस दिन तरह -तरह के लाइट और रंगोली से अपने घर को सजा कर, खुशियां बाट कर, लक्ष्मी गणेश की पूजा करके, अच्छे अच्छे पकवान बना कर हर्ष और उल्लास के साथ अपने रिश्तेदारों से मिलते हैं । इस प्रकार दिवाली का त्योहार मनाया जाता है।

(4).दिवाली क्यों और कैसे मनाई जाती है?

उत्तर:- माना जाता है कि इस दिन 14 साल के वनवास के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी हुई थी। साथ ही अंधकार पर रोशनी का प्रतीक के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है।इस दिन अपने घरों की सफाई और उन्हें तरह तरह के लाइट से सजाने के बाद लक्ष्मी गणेश की पूजा के साथ दीपावली का त्योहार धूम धाम से की जाती है। रात के समय बच्चे आतिशबाजी का भी आनंद उठाते हैं।

(5).दिवाली में क्या है खास?

उत्तर:- इस त्योहार के शुभ अवसर पर लोग अपने घरों को रंगोली और तेल के दीयों से सजाते हैं।सभी एक दूसरे को बधाई देते हैं। इस दिन अच्छे अच्छे पकवान बनाए जाते हैं। बच्चों के द्वारा पटाखों से आतिशबाजी होते हैं। सभी मिल-जुल कर सौहार्द के साथ दिवाली के पर्व को मनाते हैं।

(6).दीपावली का अर्थ क्या है?

उत्तर:- दीपावली’ संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है – दीप + आवली। ‘दीप’ अर्थात ‘दीपक’ और ‘आवली’ अर्थात ‘श्रृंखला’, ।इसका मतलब होता है, दीपकों की श्रृंखला या दीपों की पंक्ति।

दोस्तों, उम्मीद है कि Diwali par nibandh in hindi पोस्ट आपको अच्छी लगी होगी। ऐसे ही और पोस्ट पढ़ने के लिए इस वेबसाइट के साथ हमेशा बने रहे।

अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद। 💐💐

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