Kartik purnima puja vidhi 2023 in hindi : कार्तिक पूर्णिमा की पूजा विधि, ऐसे करें पूजा घर पर बरसेगा त्रिदेवों की कृपा

दोस्तों, यदि आप कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को पूजा करके त्रिदेवों को प्रसन्न करना चाहते हैं, तथा उनकी कृपा दृष्टि प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप Kartik purnima puja vidhi 2023 in hindi  पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें। इस पोस्ट में कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को किए जाने वाले पूजा विधि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।

कार्तिक पूर्णिमा 

कार्तिक मास का पुराणों में भी बहुत अधिक महत्व दिया गया है। इस माह में किए जाने वाले सत्कर्म का कई गुना फल प्राप्त होता है। कार्तिक माह में सभी देवता गण अपने भक्तों पर विशेष कृपा दृष्टि की बर्षा करते हैं।

पूर्णिमा तिथि का अपने आप में ही बहुत अधिक महत्व होता है। ऐसे में कार्तिक पूर्णिमा की बात तो कुछ अलग ही होती है। इस दिन पूजा-अर्चनाएं करने से त्रिदेवों और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा भक्तों को प्राप्त होती है, तथा पूरे वर्ष जीवन खुशियों के साथ व्यतीत होता है।

मैं बताना चाहूंगी कि सभी पूर्णिमा तिथियों में कार्तिक पूर्णिमा का जो स्थान है, उसका वर्णन शब्दों में नहीं कर सकते हैं। किसी भी प्रकार का पूजन करना हो तो उसे विधि- पूर्वक करना ही उचित माना जाता है।

जब तक पूजा पूर्ण विधि-विधान, सच्ची भक्ति तथा पूर्ण श्रद्धा के साथ ना किया जाए ,तो उसका कोई महत्व नहीं मिलता है। यदि आप भी अपने घर पर या किसी मंदिर में कार्तिक मास के पूर्णिमा तिथि को पूजा-अर्चना करना चाहते हैं, तो इस पोस्ट में दिए गए पूजा विधि को अच्छे से अवश्य पढ़ें।

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कार्तिक पूर्णिमा 2023

हिंदू धर्म के पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 26 नवंबर 2023 को दोपहर 3:53 से हो जाएगा तथा 27 नवंबर को दोपहर 2:45 पर समाप्त होगा।

इसलिए उदया तिथि के अनुसार इस वर्ष 27 नवंबर 2023 को कार्तिक पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाएगा। इस तिथि को सतनारायण भगवान की कथा तथा पूजा-अर्चनाएं करने से माता लक्ष्मी और विष्णु भगवान दोनों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन अन्य देवताओं की भी विशेष पूजा-अर्चनाएं की जाती है।

इस वर्ष 27 नवंबर 2023 को कार्तिक पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाएगा। इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा तिथि को सर्वार्थ सिद्धि योग तथा शिव योग बनेगा। इस दौरान धर्म-कर्म के कार्य करने से जातकों को दोगुना शुभ-फल  प्राप्त होता है। इस दिन स्नान-ध्यान और दान का विशेष महत्व बताया गया है।

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कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि 2023

• कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रातः काल सूर्योदय से पहले ही उठकर पवित्र नदी या कुंड में स्नान आदि से निवृत हो जाना चाहिए।

• इस दिन संभव हो सके तो घर पर गंगाजल का पानी मिलाकर स्नान करें।

• इसके पश्चात भगवान लक्ष्मी नारायण की विधि-विधान तथा सच्ची श्रद्धा और पूर्ण भक्ति भाव के साथ पूजा अर्चना करें।

• उनके समक्ष घी या सरसों के तेल का दीपक विधि पूर्वक प्रज्वलित करें।

• कार्तिक पूर्णिमा तिथि के दिन पूजा कर हवन भी कर सकते हैं।

• इसके पश्चात भगवान सतनारायण की कथा कहानी सुननी या पढ़नी चाहिए।

• इसके पश्चात नारायण भगवान को खीर का भोग लगाएं तथा इसे अन्य लोगों में वितरित कर आप अभी प्रसाद ग्रहण करें।

• सायं काल में लक्ष्मी नारायण जी की आरती करने के पश्चात तुलसी जी की भी आरती अवश्य करें।

• साथ ही इस पूर्णिमा तिथि को दीपदान करना बहुत ही अति शुभ फलदायी माना जाता है।

• इसलिए इस रात्रि में दीपदान अवश्य करें। अपने घरों तथा मंदिरों में दीप प्रज्वलित करें। घर की चौखट पर दीपक अवश्य जलाएं।

• कोशिश करें कि कार्तिक पूर्णिमा तिथि के दिन किसी ब्राह्मण, गरीब या असहाय लोगों को भोजन करवा पाएं। 

• जरूरतमंदों को भोजन करना तथा उन्हें अपनी सामर्थ्य के अनुसार मदद करना बहुत ही पुण्य का कार्य माना जाता है।

✓कार्तिक पूर्णिमा तिथि के दिन यदि आप जरूरतमंदों को सहायता करते हैं, तथा भोजन कराते हैं, तो आप पर विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा पूरे वर्ष बनी रहेगी। कभी भी आपके घर में धन-धान्य की कमी नहीं होगी।

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कार्तिक पूर्णिमा की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का एक राक्षस था जिसके तीन पुत्र थे। इसके तीनों पुत्रों का नाम तारकक्ष, कमलाक्ष तथा विद्युन्माली था।

भोले शिव शंकर के बड़े पुत्र कार्तिकेय जी ने जब तारकासुर का वध कर दिया तो अपने पिता की हत्या की खबर सुनकर तीनों पुत्र बहुत दुखी हुए।

इन तीनों ने मिलकर ब्रह्मा जी से वरदान मांगने के लिए घोर तपस्या की। ब्रह्मा जी इन तीनों की तपस्या से प्रसन्न हुए तथा बोले कि मांगो जो वरदान मांगना चाहते हो।

तब तीनों ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांगा परंतु ब्रह्मा जी ने उन्हें इसके अतिरिक्त कोई और वरदान मांगने को कहा।

इन तीनों मिलकर पुनः सोचा कि इस बार ब्रह्मा जी से तीन अलग नगरों का निर्माण करवाने के लिए कहा जाए। जिसमें सभी बैठकर सारी पृथ्वी-आकाश में विचरण कर सकेंगे।

1000 साल बाद जब हम मिलेंगे और हम तीनों के नगर मिलकर एक हो जाए और जो देवता तीनों नगरों को एक ही बार में नष्ट करने की क्षमता रखते हैं ,उसी से हमारी मृत्यु हो नहीं तो किसी से नहीं।

ऐसा सुनकर ब्रह्मा जी ने इन तीनों को यह वरदान दे दिया।तारकासुर के तीनों पुत्र यह वरदान पाकर बहुत खुश हुए। ब्रह्मा जी के कहने पर मयदानव ने उनके लिए तीन नगरों का निर्माण कर दिया।

तरकाक्ष के लिए सोने का,  कमलाक्ष के लिए चांदी का तथा विद्युन्माली के लिए लोहे का नगर का निर्माण कर दिया।इन तीनों ने मिलकर तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा लिया। इंद्र देवता इन तीनों राक्षस से बहुत अधिक भयभीत हो गए,तथा भगवान भोलेनाथ की शरण में चले गए।

इंद्र आदि देवताओं की पुकार सुनकर भगवान शिव शंकर इन दोनों का नाश करने के लिए एक दिव्य रथ की निर्माण किए।

दिव्य रथ की हर एक चीज देवताओं से बनी थी। चंद्रमा और सूर्य इस रथ के पहिए बने, इंद्र, वरुण,यम और कुबेर रथ के चार घोड़े बन गए। हिमालय धनुष तो शेषनाग प्रत्यंचा बन गया।

भोलेनाथ खुद बाण बन गए तथा बाण की नोक पर अग्नि देव विराजमान हो गए। इस दिव्य रथ पर सवार हुए खुद भगवान शिव शंकर।

देवताओं से बने इस रथ और तीनों भाइयों के बीच भयंकर युद्ध होता रहा। जैसे ही यह तीनों रथ एक सीध में आए तब भगवान भोलेनाथ ने बाण छोड़कर इन तीनों रथों का नाश कर दिया।

इसके पश्चात भगवान शिव शंकर को त्रिपुरारी भी कहा जाने लगा। यह बध कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन हुआ था। इसलिए इस पूर्णिमा को त्रिपुरा पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

इस  पूर्णिमा के दिन सच्ची श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ पूजा-अर्चना करने तथा जरूरतमंदों को सहायता करने से सभी देवी देवताओं का एक साथ आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिससे जीवन की हर एक समस्याएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है, तथा शुभ फल की प्राप्ति होती है एवं पूरे वर्ष खुशहाल जीवन व्यतीत होता है।

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अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।💐💐

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