Kisi desh ko sanvidhan ki avashyakta kyon padati hai | हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है

दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेंगे कि Kisi desh ko sanvidhan ki avashyakta kyon padati hai ? संविधान का क्या अर्थ होता है? और संविधान और लोकतांत्रिक सरकार से संबंधित जानकारी हासिल करेंगे इसलिए इस पोस्ट को शुरू से अंत तक अवश्य पढ़ें।

संविधान की जरूरत और इसके महत्व के बारे में इस बात से भी अनुमान लगा सकते हैं, कि वर्तमान समय में सभी विकसित देशों के पास अपना संविधान है। यह अलग बात है कि किसी देश के पास लिखित संविधान है, तो किसी देश के पास अलिखित संविधान है।

आपको मालूम होगी कि क्रिकेट या फुटबॉल या किसी भी अन्य खेल में कुछ निश्चित नियम होते हैं, या फिर आप अपने घरों में भी देखते होंगे कि कुछ नियम बनाए गए होते हैं।

जैसे की, क्या करना है?, क्या नहीं करना है?, किसे करना है?, कब करना है ?,कहां करना है ?,किसे नहीं करना है? इत्यादि।

नियमों के बिना जिस प्रकार से किसी खेल में हार-जीत का निश्चय कर पाना मुश्किल होता है, या फिर किसी एक छोटे से परिवार को सुचारू रूप से चलाना आसान नहीं होता। ठीक उसी प्रकार से एक देश को बिना किसी नियम कानून के चलाना सही नहीं होता है।

इसलिए एक लोकतांत्रिक देश में संविधान का होना महत्वपूर्ण माना जाता है। संविधान उन बुनियादी नियमों का एक समूह (set of rules) है, जो की किसी देश को सुचारू रूप से व्यवस्थित करने हेतु कार्य करता है।

संविधान के आधार पर ही हम सब अपने देश में कानून व्यवस्था को संचालित करते हैं, और यह उम्मीद करते हैं कि हमारा देश का नियम-कानून व्यवस्थित रहे।

एक लोकतांत्रिक देश में संविधान की भूमिका को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:-

(1).संविधान नागरिकों में विश्वास जगाने का काम करता है। लोग यह विश्वास कर पाते हैं कि उनके अधिकारों की प्राप्ति के प्रावधान संविधान में वर्णित किए गए हैं।

(2). संविधान से ही हमें मालूम चलती है, कि हमारे देश की व्यवस्था किस प्रकार से काम करेगी। इसके अंतर्गत चुनाव प्रणाली, सरकार का गठन, (व उसका निलंबन भी) तथा शक्तियों की बटवारा एवं अधिकारों की रक्षा संबंधित मुद्दों के बारे में भी प्रावधान किए गए होते हैं।

(3). संविधान का महत्व इसलिए भी होता है, कि यह सरकार को एक सही दिशा पर काम करने को प्रेरित करता है।

(4). संविधान का एक अहम कर्तव्य ये भी है कि यह स्वयं की कमियों या वर्तमान समय की मांग के अनुसार संशोधनों के लिए भी एक युक्ति प्रदान करे। देश के संविधान में ऊपर वर्णित सभी गुणों का अच्छे से समावेश किए गए हैं।

तो आइए जानते हैं कि सरल शब्दों में संविधान को कैसे वर्णित कर सकते हैं?

संविधान क्या है?

              “किसी भी देश को सही तरीके से चलाने के लिए हमें संविधान की जरूरत पड़ती है। संविधान उन आदर्शों को सूत्रबद्ध करता है, जिससे हम अपने देश को अपनी इच्छा और अपने सपनों के अनुसार रख सके। अपने देश में कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित कर सके, तथा नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके।”

              “संविधान कानून का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। यह सरकार की मूल संरचना और इसके कार्यों को निर्धारित करता है।संविधान सरकार के अंगों तथा नागरिकों के आधारभूत अधिकारों को परिभाषित तथा सीमांकित भी करता है।”

               “संविधान लिखित नियमों की एक ऐसी किताब है, जिसे किसी देश के सभी नागरिकों द्वारा सामूहिक रूप से माना जाता है। संविधान से किसी क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के बीच आपसी संबंध निर्धारित होने के साथ-साथ सरकार और नागरिकों के बीच भी संबंध तय होते हैं।”

संविधान किसी देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए अनेक कार्य करता है, जिनमें से प्रमुख कार्य निम्नलिखित है:-

✓संविधान भिन्न-भिन्न समुदायों के लोगों के बीच भरोसे तथा सहयोग को विकसित करता है। इनके बीच आपसी संबंधों को मजबूत करके देश में भाईचारे को बढ़ावा देता है।

✓संविधान ही यह स्पष्ट करता है कि किस प्रकार से सरकार का गठन किया जाएगा और किसके पास फैसले लेने के अधिकार होंगे।

✓यह सरकार के अधिकारों को सीमांकित करता है, तथा बताता है कि नागरिकों के पास कौन-कौन से अधिकार है, एवं नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने का प्रावधान भी करता है।

✓संविधान ही एक अच्छे समाज के गठन के लिए लोगों की आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करता है।

हमें संविधान की आवश्यकता क्यों है?

संविधान किसी देश को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बनाया जाता है। यह नागरिकों के हित में होता है, चाहे फिर यह किसी भी देश का क्यों ना हो?

संविधान को समय अनुसार परिवर्तित भी किया जा सकता है। जैसे भारत देश का संविधान को एक जीवंत संविधान कहा जाता है, क्योंकि इसमें समय की मांग के अनुसार परिवर्तित होने का गुण विद्यमान है।

किसी देश को संविधान की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?इसे निम्नलिखित बिंदुओं से समझ सकते हैं:-

(1). यह देश को एक राजनीतिक ढांचा प्रदान करता है:-

संविधान के द्वारा किसी देश को एक राजनीतिक ढांचा प्राप्त होता है। यह सरकार के उस रूप को निर्धारित करने का कार्य करती है, जिसका वह पालन करेगी। राजनीतिक समुदाय के भीतर सरकार की सीमाएं और इसकी भूमिकाएं एवं उसके अधिकार की सीमाओं निर्धारित करता है।

संविधान सरकार को मनमानी करने से भी रोकता हैं। यह सत्ता में पदासीन लोगों को बहुत शक्तिशाली बनने और दमनकारी प्रवृत्ति अपनाने पर भी रोक लगता है।

(2).संविधान देश में एक संतुलित सरकार स्थापित करने का कार्य करता है:-

संविधान वह उपकरण है, जो सरकारी संस्थाओं के बीच सत्ता को अलग करने और वितरित करने में सहायता करता है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक संस्थाओं के पास सीमित शक्ति है।

इसका उपयोग दूसरे को नियंत्रित करने और जांचने के लिए भी किया जा सकता है। यह किसी एक संस्था को दूसरे संस्था पर हावी होने से भी रोक लगाता है। यह अनियंत्रित राज्यशक्ति को नियंत्रित भी करता है।

(3). संविधान सामाजिक उपकरण के रूप में भी कार्य करता है:-

किसी देश को एक संविधान की आवश्यकता इसलिए भी होती है, क्योंकि संविधान सामाजिक कार्य या आर्थिक विकास के लिए भी होता है।

भारतीय संविधान सहित दुनिया के कई संविधानों ने यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, की सबसे अधिक निम्न वर्ग के लोगों को उसका हक प्राप्त होना चाहिए। इस तरह से किसी क्षेत्र में अल्पसंख्यक लोगों को भी निर्भय होकर जीने में मदद करता है।

भारतीय संविधान के भाग 4 में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत सरकार को पर्यावरण की रक्षा करने सभी बच्चों के लिए शिक्षा को बढ़ावा देने और श्रम अधिकारों को बनाए रखने के लिए कानून बनाने हेतु प्रेरित करता है।

(4). नागरिकों को मूल अधिकार प्रदान करता है

किसी देश का संविधान किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को उनकी गरिमा पूर्ण जीवन जीने और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए कुछ अधिकारों और प्रावधानों के गारंटी देता है। यह देश के नागरिकों को उनके सभी मूल अधिकारों का आनंद उठाने की आज्ञा देता है। संविधान लोगों के जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति और लोकतंत्र में भागीदारी के मौलिक अधिकारों की संरक्षण प्रदान करता है।

(5). यह संप्रभु और स्थिर सरकार के रक्षा करता है

एक देश को संविधान की आवश्यकता इसलिए भी पड़ती है,क्योंकि संविधान राजनीतिक समुदाय के राजनीतिक और सामाजिक आधार को स्थापित करने का कार्य करता है। यह राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ समुदाय के संप्रभुता की अखंडता को सुनिश्चित करता है।

आपको ज्ञात होगी कि एक कमजोर राजनीतिक संरचना एक राष्ट्र को बाहरी लोगों के प्रति संवेदनशील बनाने का काम करती है।जो राजनीतिक समुदाय संवैधानिकता का अभ्यास नहीं करते हैं, उनके पतन की संभावना अधिक बनी रहती है।

(6).लोकतांत्रिक मूल्यों और मानव अधिकारों को कायम रखना

आधुनिक लोकतांत्रिक देश संविधानों पर निर्भर है। लोकतांत्रिक राष्ट्र-राज्यों के कई संविधान इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि नेताओं के चयन की प्रक्रिया निष्पक्ष और भ्रष्टाचार से मुक्त हो सके। संविधान लोगों को वोट देने के अधिकार के साथ-साथ सत्ता में बैठे लोगों की आलोचना करने का भी अधिकार प्रदान करता है।

एक लोकतांत्रिक समाज को प्रतिनिधि सरकार चुनाव और सत्ता के दलालों के आलोचना करने की स्वतंत्रता द्वारा परिभाषित किया जा सकता है, क्योंकि लोकतांत्रिक समाज में लोगों को बोलने की आजादी प्राप्त होती है।

संविधान के द्वारा अभिव्यक्ति का अधिकार दिया गया होता है। संविधान का उद्देश्य है, नागरिकों के मौलिक अधिकारों की गारंटी देना, उनके अधिकारों का संरक्षण करना ,उल्लंघन होने पर उस पर उचित कार्यवाही करना।

(7).संविधान सभी प्रश्नों का उत्तर देता है

हमें संविधान की आवश्यकता क्यों पड़ती है? इसका उत्तर यह है कि संविधान हमारे सभी प्रश्नों का उत्तर देने का कार्य करता है। हम सभी को अपने राष्ट्र के नींव के रूप में संविधान का सम्मान करना चाहिए।

इसकी गरिमा और अस्तित्व का सम्मान करना चाहिए। यह भी आवश्यक होता है कि राष्ट्र के भीतर हर कोई संविधान के नियमों का पालन करें एवं देश को सुचारू रूप से संचालन करने में मदद करें।

(8). शीर्ष निकाय की शक्ति

संविधान की आवश्यकता इसलिए भी होती है, क्योंकि संविधान में देश के सभी कानूनों को खत्म करने की शक्ति होती है। इसका मतलब यह होता है कि देश में प्रचलित किसी भी कानून या प्रावधान को संविधान के लिए जिम्मेदार बनाया जा सकता है।

संविधान की आवश्यकता है कि सरकार द्वारा अपनाया गया प्रत्येक कानून संविधान के अनुरूप हो।यदि नहीं है ,तो संविधान अपनी ताकत खो देगा और राष्ट्र के साथ गिर जाएगा।

(9). राष्ट्र के लक्ष्य को निर्धारित करता है

संविधान देश के लिए एक लक्ष्य निर्धारित करता है। यह ऐसे लक्ष्य हो सकते हैं, जो किसी देश के द्वारा हासिल करने की उम्मीद रखी जाती है। जैसे कि लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और धर्मनिरपेक्षता।

(10). राष्ट्रीय आपातकालीन शक्ति हस्तांतरण

संविधान एक महत्वपूर्ण बुनियादी नियमों का दस्तावेज होता है, क्योंकि यह राष्ट्रीय आपात स्थिति के दौरान सत्ता के हस्तांतरण को भी नियंत्रित करता है।

राष्ट्रीय आपात स्थिति एक प्राकृतिक आपदा के अनुरुप होता है, जो देश के एक हिस्से को मिटा सकती है। यह देश के किसी भी क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इसमें गृह युद्ध, गृह अशांति जैसे मुद्दे शामिल होते हैं।

(11). राजनीतिक समुदाय के लिए आदर्श की परिभाषा

संविधान कुछ ऐसे आदर्श के रूपरेखा निर्धारित करता है, जिसके लिए राजनीतिक समुदाय के संविधान निर्माताओं द्वारा प्रयास किया जाता है। इसमें न्याय सामान्य और निष्पक्षता शामिल है। उदाहरण स्वरूप भारतीय संविधान धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के मूल सिद्धांतों के रूपरेखा प्रदान करता है।

(12). यह राजनीतिक समुदाय की पहचान का निर्धारण भी करता है

कुछ संविधान राष्ट्र-राज्य ध्वज गान और प्रतीक के लिए भी दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं।

(13). संविधान राजनीतिक सत्ता के संस्थानों की स्थापना और विनियमन करता है

संविधान की आवश्यकता देश को इसलिए भी पड़ती है, क्योंकि यह सरकार के प्रत्येक अंगो के कार्यों के साथ ही उनकी संरचना और शक्तियों को भी व्याख्यायित करता है। यह विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना के रूपरेखा निर्धारित करता है।

ऐसे संस्थान बनाए जा सकते हैं, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराकर सरकार में पारदर्शिता सुनिश्चित करें। संविधान के द्वारा सत्ता में बैठे लोगों और उनकी प्रक्रियाओं के चुनाव या महाभियोग की भी निर्धारण करता है।

(14). सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच शक्तियों का वितरण करने का भी प्रावधान करता है

संविधान द्वारा परिभाषित सरकार का स्वरूप या तो संघीय हो सकता है, या फिर एकात्मक। कई संविधान सरकार के अपने स्वरूप को संघीय या अर्ध संघीय भी घोषित करते हैं ।

ऐसी राजनीतिक व्यवस्था में सरकार के प्रत्येक स्तर पर विषयों की एक सूची का होना महत्वपूर्ण होता है। यह स्थिरता सुनिश्चित करता है ,और केंद्र सरकार निचले स्तरों पर हावी नहीं हो पाती है।

(15).धर्म और राज्य के बीच संबंधों का निर्धारण

कई संविधान के द्वारा अपने राष्ट्र राज्य को धर्मनिरपेक्ष या किसी विशेष धर्म से जुड़ा हुआ घोषित किया जाता है ।भारतीय संविधान की मानें तो भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है।

इसका अभिप्राय यह है कि राज्य किसी भी धर्म का समर्थन नहीं करता है। धार्मिक देश में अपना एक धार्मिक कानून होते हैं, जो व्यक्तिगत स्थिति को निर्धारित करता है, और व्यक्तियों के बीच विवादों को सुलझाने का काम करता है।

संविधान और लोकतांत्रिक सरकार

Kisi desh ko sanvidhan ki avashyakta kyon padati hai

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। ऐसे देश में संविधान का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। लोकतंत्र में सरकार के क्रियाकलापों में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से नागरिक अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। यह ऐसी सरकार होती है जिसमें सरकार की शक्ति स्पष्ट रूप से परिभाषित की गई होती है।

लोकतांत्रिक सरकार में नागरिकों के अधिकारों का स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया होता है। सरकार तथा नागरिकों की गतिविधियों की सीमाएं किस प्रकार से निर्धारित की जाए। यह सभी संविधान निर्धारित करता है।

ऊपर वर्णित बिंदुओं के माध्यम से आप समझ पा रहे होंगे ,कि संविधान केवल एक आलेख मात्र नहीं है, बल्कि यह एक क्रियाशील संस्थाओं के आवश्यकताओं आकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं के साथ-साथ निरंतर विकसित होते रहता है।

प्रत्येक संविधान की विषय वस्तु तथा सार्थकता उसके क्रियान्वयन किए जाने के तरीके तथा उसे क्रियान्वित करने वाले व्यक्तियों पर निर्भर करता है। इस प्रकार कह सकते हैं कि संविधान एक जीवंत दस्तावेज होता है ,जो परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को परिवर्तित करते रहता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस पोस्ट को यहां तक पढ़ने के पश्चात आप समझ गए होंगे कि किसी भी देश के सफलतापूर्वक का संचालन हेतु संविधान का होना कितना महत्वपूर्ण होता है। संविधान के होने से सभी कार्य नियमित रूप से कार्यान्वित होते हैं।

पूरे विश्व में भारतीय संविधान को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। भारतीय संविधान दुनिया में सबसे विस्तृत और लंबी संविधान हैं।यह सभी नागरिकों को धर्मनिरपेक्षता की गारंटी देता है।

अतः हम सभी को अपने संविधान का सम्मान करते हुए नि:संकोच रूप से पालन करना चाहिए।

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इस पोस्ट से संबंधित प्रश्न-उत्तर

( 1).हमें भारतीय संविधान की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर:- भारत को आजादी प्राप्त होने के पश्चात इसके समक्ष विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हुई ।जैसे की जातिवाद, धार्मिक कट्टरता, भ्रष्टाचार इत्यादि। इन्हीं समस्याओं को नियंत्रित करने हेतु संविधान की आवश्यकता महसूस हुई और भारतीय संविधान लागू होने के पश्चात काफी हद तक इस पर नियंत्रण पाया जा सका है।

(2). संविधान के अर्थ और इसकी आवश्यकता क्या है?

उत्तर:-संविधान वह सत्ता है जो सर्वप्रथम एक सरकार बनती है संविधान का दूसरा काम या स्पष्ट करना होता है कि समाज में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होगी संविधान के द्वारा यह भी तय किया जाता है कि सरकार किस प्रकार से निर्मित की जाएगी।

(3). सबसे छोटा संविधान किस देश का है?

उत्तर:- सबसे छोटा संविधान मोनाको देश का है यह संविधान इतना छोटा है कि इस संविधान में केवल तीन पेज 33 लेख और 3814 शब्द ही है।

(4). सबसे कठोर संविधान किस देश का है?

उत्तर:-अमेरिका का संविधान विश्व का सबसे कठोर संविधान है ,तथा ब्रिटेन का संविधान विश्व का सबसे लचीला संविधान है।

(5). विश्व का सबसे लंबा संविधान किस देश का है?

उत्तर:-भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा संविधान है। इसमें 1,45,000 शब्दों का प्रयोग किया गया है। इसकी रचना 1947 और 1950 के बीच हुई है। मूल रूप से इस संविधान में 395 अनुच्छेद 8 अनुसूचियां और 22 भाग थे। इस संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया था ,और 26 जनवरी 1950 को संपूर्ण भारत पर लागू किया गया था।

अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।💐💐

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