Laxmi puja 2023 date and time and Significance : दीवाली कब है 2023/पांच राजयोग के साथ इस शुभ मुहूर्त में होगी दिवाली पर लक्ष्मी पूजा

कई दशकों के पश्चात इस बार की दिवाली में बहुत ही शुभ योग और राजयोग का निर्माण हुआ है। यदि आप इसके बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस Laxmi puja 2023 date and time and Significance पोस्ट को अंत तक पढ़े। अपने दोस्तों के साथ शेयर भी करें। ताकि वह भी इसका फायदा उठा सकें।

दोस्तों, आप जानते हैं कि दिवाली का त्यौहार हिंदू के प्रसिद्ध त्योहार में से एक माना जाता है। इस त्यौहार को बच्चों से लेकर बूढ़े तक बहुत ही उत्साह के साथ मनाते हैं। वैदिक ज्योतिषाचार्य की गणना के अनुसार इस वर्ष की दीपावली बहुत ही खास रहेगी। इस वर्ष लंबे वर्ष के पश्चात शूभ योग और राजयोग का निर्माण हुआ है।

इस वर्ष की दिवाली 12 नवंबर को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि पर पूरे देश भर में दिवाली का पर्व बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।

दिवाली के दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य गणेश की पूजा-अर्चना विशेष रूप से की जाती है। दिवाली की तैयारी कई हफ्ते पहले ही शुरू हो जाती है।

दिवाली के शुभ अवसर पर पूरे घर को दीयों और रंग- बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। हर वर्ष यह दिवाली का त्यौहार 5 दिनों तक चलता है। यदि आप इस पर्व के बारे में और भी विस्तृत जानकारी पाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके प्राप्त कर सकते हैं।

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यह त्योहार धनतेरस से शुरू होता है, और इसके बाद नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली मनाई जाती है। इसके पश्चात दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और आखिरी दिन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है।

वैदिक शास्त्रों के अनुसार इस वर्ष की दीपावली बहुत ही खास रहेगी, क्योंकि कई दशकों के पश्चात दिवाली पर एक साथ कई शुभ योग और राज्य योग का निर्माण हुआ है।

इस वर्ष धन के देवी मां लक्ष्मी और विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर विशेष फल प्राप्त कर सकते हैं, परंतु इसके लिए शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी होना बहुत ही आवश्यक है। इसलिए इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

दीवाली 2023 और शुभ राज योग

दीपावली का त्यौहार हर वर्ष की भांति कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को जो कि इस बार 12 नवंबर को हो रहा है, मनाई जाएगी। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और मंगल मूर्ति भगवान गणेश के पूजा-अर्चना का काफी महत्व होता है।

दिवाली के शुभ अवसर पर सभी के घरों में इनकी पूजा-अर्चना हर्षोल्लास के साथ संपन्न की जाती है। यदि दिवाली पर लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल के समय में किया जाए तो, बहुत ही शुभ फलदायक माना जाता है।

इस वर्ष 12 नवंबर को अमावस्या तिथि करीब दोपहर में 2:30 पर शुरू हो जाएगी। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दिवाली के शाम के समय जब माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना होगी, इस दौरान पांच राज योग का निर्माण भी होगा।

इसके अतिरिक्त आयुष्मान सौभाग्य और दूसरा योग भी बनेगा। इस प्रकार से इस बार की दिवाली आठ शुभ योग में मनाई जाएगी।

ज्योतिषाचार्य की मानें तो दीपावली पर इस प्रकार का शुभ योग कई दशकों के पश्चात बना हुआ है।इसलिए इस शूभ योग में दिवाली सभी के लिए सुख-समृद्धि और शुभ फलदायक साबित होगी।

Laxmi puja 2023 date and time and Significance

दीपावली पर पांच राजयोग

इस वर्ष की दीपावली पर एक साथ पांच राज योग देखने को मिलेंगे। यह पांच राजयोग गजकेसरी, हर्ष, उभयचरी, काहल, दुर्धरा नाम के होंगे। इन राजयोगों का निर्माण शुक्र, बुद्ध, चंद्रमा और गुरु ग्रह स्थितियों के करण हो रहा है।

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक गजकेसरी योग को बहुत ही शुभ फलदायक माना जाता है। यह योग मान- सम्मान और लाभ देने वाला होता है। वंही हर्ष योग की बात की जाए तो धन में वृद्धि और यश दिलाने वाला होता है। जबकि अन्य तीन योग काहल ,उभयचरी और दुर्धरा योग शुभता और शांति लाता है।

कई वर्षों के पश्चात इस वर्ष की दिवाली पर यह दुर्लभ संयोग देखने को मिलेगा। जब शनि अपनी स्वयं की राशि कुंभ में विराजमान होकर शश महापुरुष राजयोग का निर्माण करेंगे। इसके अतिरिक्त इस वर्ष की दिवाली पर आयुष्मान और सौभाग्य योग का भी निर्माण होगा।

12 नवंबर को सुबह चतुर्दशी और दोपहर बाद अमावस्या तिथि

इस वर्ष छोटी दीवाली और बड़ी दिवाली दोनों एक ही दिन यानी की 12 नवंबर को ही मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार 12 नवंबर के सुबह तक रूप चौदस रहेगी। फिर इसके पश्चात दोपहर 2:30 बजे के बाद कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार अमावस्या तिथि को ही दिवाली मनाई जाती है, और माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है।

इसलिए दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा 12 नवंबर की रात्रि को की जाएगी। अमावस्या तिथि 13 नवंबर को दोपहर 3:00 बजे तक रहेगी।

दिवाली का त्यौहार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की रात्रि में मनाई जाती है। इस वर्ष कार्तिक महीने के अमावस्या तिथि 12 और 13 नवंबर दोनों ही दिन हो रही है।

इसलिए लोगों में यह संकोच बनी हुई है, कि किस तिथि को दिवाली का त्यौहार मनाई जाए। दरअसल हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार दिवाली पर लक्ष्मी पूजा हमेशा ही अमावस्या तिथि और प्रदोष काल के संयोग में करना शुभ माना जाता है, और यह संयोग 12 नवंबर को हो रहा है। इसलिए इस वर्ष 12 नवंबर को ही दिवाली का त्यौहार मनाई जाएगी।

✓दिवाली पर लक्ष्मी गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त:- 12 नवंबर 2023

✓लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त:- शाम 05:40 से शाम 07:36 तक।

✓लक्ष्मी गणेश पूजा के शुभ मुहूर्त अवधि:- 1 घंटा 54 मिनट

✓प्रदोष काल:- 05:29 से 08:07 तक

✓वृषभ काल:- 05:40 से 07:36 तक

दिवाली महान महा-निशीथ काल पूजा मुहूर्त

✓लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 11:39 से 12:31 तक

✓अवधि :- 52 मिनट

✓महानिशिथ काल:- 11:39 से 12:30 तक

✓सिंह काल :- 12:12 से 2:30 तक

दिवाली शुभ चौघड़िया पूजा मुहूर्त

✓अपराह्न शुभ मुहूर्त:- 01:26 से 02: 47 तक 

✓सायं काल शुभ मुहूर्त:- 05:29 से 10:26 तक

✓रात्रि मुहूर्त:- 1:44 से 3:30 तक 

✓उषा काल मुहूर्त :-5:02 से 6:41 तक

FAQ :-इस पोस्ट से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

(1).2023 में लक्ष्मी पूजा कितने तारीख को मनाया जाएगा?

उत्तर:- वर्ष 2023 में लक्ष्मी पूजा 12 नवंबर को मनाई जाएगी, क्योंकि इसी तारीख को कार्तिक मास की अमावस्या तिथि हो रही है। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को ही दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है।

(2).क्या धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं?

उत्तर:-धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल के समय में की जानी चाहिए। प्रदोष काल शाम के बाद शुरू होती है, और लगभग दो घंटे 24 मिनट तक चलती है।

(3). धनतेरस पर क्या-क्या करना चाहिए?

उत्तर:- धनतेरस के दिन गायों की पूजा करनी चाहिए, और उन्हें रोटी और हरी घास आदि खिलानी चाहिए। धन्वंतरि जयंती के शुभ अवसर पर औषधीय बांटनी चाहिए ,तथा जरूरतमंद लोगों को सहायता भी करनी चाहिए ।इससे माता लक्ष्मी और धनवंतरी भगवान खुश होते हैं।

(4).धनतेरस पूजा की व्यवस्था कैसे की जाती है?

 उत्तर:- धनतेरस पूजा की तैयारी के लिए अपने घर को अच्छे से साफ करना चाहिए। देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए प्रवेश द्वार को रंगोली से सजाना चाहिए। पूजा के लिए निर्दिष्ट क्षेत्र में एक अच्छी बेदी स्थापित कर देवी लक्ष्मी की एक मूर्ति या तस्वीर रखकर पूजा अर्चना की जानी चाहिए ।छवि के सामने एक तेल का दीपक जलाना चाहिए।

(5).धनतेरस की पूजा कैसे करनी चाहिए?

उत्तर:- धनतेरस पूजा आमतौर पर शाम के समय उत्तर दिशा में एक मंच पर कुबेर भगवान धन्वंतरि और महादेवा लक्ष्मी की तस्वीर रखकर की जाती है ।लोग मूर्तियों के सामने देसी घी का दीपक जलाते हैं, और धूप, फूल, रोली तथा चंदन अर्पित कर पूजा अर्चना करते हैं।

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अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद। 💐💐

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