Manav adhikar kya hai| मानव अधिकार/मानवाधिकार क्या है? इसके बारे में विस्तार से जानें

Manav adhikar kya hai पोस्ट में आपको विस्तार से मानवाधिकार के बारे में जानकारी प्राप्त होगी। इसलिए इस पोस्ट को अंत तक पढ़े।

 मानवाधिकार वैसे अधिकार होते हैं, जो की मनुष्य होने के नाते प्राप्त होते हैं। यह अधिकार राष्ट्रीयता, लिंग, जातीय मूल्य, रंग, धर्म ,भाषा या किसी अन्य स्थिति की परवाह किए बिना सभी मनुष्यों को प्राप्त होता है।

इस अधिकार में सबसे मौलिक, जीवन के अधिकार से लेकर वे सभी अधिकार शामिल हैं जो जीवन को जीने काबिल बनाते हैं, जैसे कि भोजन ,शिक्षा, काम ,स्वास्थ्य और स्वतंत्रता का अधिकार ।

प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1948 के उस दिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जब संयुक्त राष्ट्र ( UN) महासभा के द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा ( UDHR) को अपनाया गया था।

मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR), मानव अधिकारों के अंतर्राष्ट्रीय विधेयक का एक हिस्सा है।

कई क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ जिनेवा में इसका मुख्यालय है। मानव अधिकारों के ऊंचायुक्त के कार्यालय ने मानव अधिकारों के प्रचार और संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में अग्रणी भूमिका निभाई है।

मानवाधिकारों का अंतर्राष्ट्रीय विधेयक क्या है?

द्वितीय विश्व युद्ध (वर्ष 1939-45) के पश्चात शुरू हुई घोषणाओं और अनुबंधों के एक श्रृंखला के द्वारा सार्वभौमिक मानव अधिकार स्पष्ट हुए।

पहली बार वर्ष 1948 में देश सार्वभौमिक मानव अधिकारों की व्यापक सूची पर सहमत हुए थे। इसी वर्ष दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, मिल का पत्थर जो अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार कानून के विकास को गहराई से प्रभावित करेगा,इसे अपना लिया।

 मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के 30 लेख, वर्तमान और भविष्य के मानव अधिकार सम्मेलनों, संधियों और अन्य कानूनी उपकरणों के सिद्धांत तथा निर्माण खंड प्रदान करते हैं।

वर्ष 1966 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा दो अंतरराष्ट्रीय संधियों को अपनाया गया ,जो अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकारों को और आकर देंगी।

आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदा  (ICESCR) जिसकी निगरानी आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की समिति के द्वारा की जाती है।

नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय (ICCPR ICCPR) जिसकी निगरानी मानव अधिकार समिति के द्वारा की जाती है।

इन सभी को अक्सर “अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध” के रूप में जाना जाता है।

 मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) और इन दोनों प्रसंविदाओं को एक साथ मानव अधिकारों के अंतरराष्ट्रीय विधायक के रूप में जाना जाता है।

मानवाधिकारों से संबंधित अन्य संधियाँ कौन सी हैं?

अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी कानून (IHL) और अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार कानून अंतर्राष्ट्रीय कानून के पूरक निकाय माने जाते हैं।ये कुछ समान उद्देश्यों को साझा करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी कानून नियमों का एक समूह है । यह मानवीय कारणों से हूए सशस्त्र संघर्ष के प्रभावों को सीमित करने की मांग करता है।

इसके द्वारा उन लोगों की रक्षा किया जाता है ,जो शत्रुता में शामिल नहीं होते हैं, और युद्ध के साधनों एवं तरीकों को प्रतिबंधित करते हैं।इस कानून को युद्ध के कानून या सशस्त्र संघर्ष के कानून के रूप में भी जाना जाता है।

✓नरसंहार के अपराध की रोकथाम और सज़ा पर कन्वेंशन (वर्ष 1948)

✓नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर कन्वेंशन (वर्ष 1965)

✓महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर अभिसमय (वर्ष 1979)

✓अत्याचार और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमान जनक व्यवहार या सज़ा के खिलाफ कन्वेंशन (वर्ष 1984)

✓बाल अधिकारों पर कन्वेंशन (वर्ष 1989)

✓सभी प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों के सदस्यों के अधिकारों के संरक्षण पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (वर्ष 1999)

✓जबरन अगुआ करने से सभी व्यक्तियों की सुरक्षा के लिये अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (वर्ष 2006)

✓विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर कन्वेंशन (2006)

✓वर्ष 2011 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के द्वारा व्यापार और मानवाधिकारों पर मार्गदर्शक सिद्धांतों को पारित किया गया।

भारत में मानवाधिकारों से संबंधित प्रावधान क्या हैं?

 हमारे देश के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार, संविधान द्वारा गारंटीकृत व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान से संबंधित सभी अधिकारों के रूप में मानवाधिकार या अंतर्राष्ट्रीय अनुबंधों में सन्निहित तथा भारत में अदालतों द्वारा लागू किये जाने योग्य हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

✓हमारे देश में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना वर्ष 1993 में की गई थी।

✓जिस कानून के तहत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को स्थापित किया गया है। वह है- मानवाधिकार अधिनियम (PHRA), 1993 का संरक्षण।

✓यह अधिनियम राज्य मानवाधिकार आयोगों की स्थापना का भी प्रावधान करता है।

भारतीय कानूनों में शामिल मानवाधिकार

भारतीय संविधान में मानवाधिकारों के कई प्रावधानों को शामिल है।

✓मौलिक अधिकारों का भाग III अनुच्छेद 14 से 32 तक।

✓संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 तक भारत के प्रत्येक नागरिक को समानता के अधिकार की गारंटी प्रदान किया है।

✓अनुच्छेद 19 भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित है ।

✓अनुच्छेद 21 जीवन एवं स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है।

मौलिक मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में:-

✓ मौलिक मानवाधिकारों के उल्लंघन होने पर नागरिक, अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय में  अपील करने जा सकते हैं।

✓राज्य के नीति निदेशक तत्त्व अनुच्छेद 36 से 51 तक।

✓भारत देश मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा का हस्ताक्षर कर्त्ता है, और इसने ICESCR एवं ICCPR की भी पुष्टि की है।

भारत ने निम्न की पुष्टि की है:-

✓नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय

✓महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर अभिसमय

✓बाल अधिकारों पर अभिसमय

✓विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर अभिसमय

भारत में कुछ अन्य संबंधित कानून और नीतियाँ 

✓अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम (वर्ष 2006)

✓भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना अधिनियम (वर्ष 2013) में उचित मुआवज़ा तथा पारदर्शिता का अधिकार

✓स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम (वर्ष 2014)

✓जन धन खाता

✓उज्ज्वला गैस कनेक्शन

✓प्रधानमंत्री आवास योजना

✓तीन तलाक

✓ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिये राष्ट्रीय पोर्टल, गरिमा गृह

मानवाधिकारों के संबंध में उभरती चुनौतियाँ क्या हैं?

✓राज्य के द्वारा जान-बूझकर या राज्य की लापरवाही के परिणामस्वरूप मानवाधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।

✓इतिहास में दर्ज मानव अधिकारों के सबसे गंभीर एवं प्रसिद्ध उल्लंघनों में से एक है:- समलैंगिकों, यहूदियों कम्युनिस्टों, स्लावों तथा अन्य समूहों को एडॉल्फ हिटलर के “दुनिया को साफ करने” के एजेंडे के हिस्से के रूप में मानवता से इन्हें वंचित कर दिया गया था।

सम्मान से जीने का अधिकार:-

हाथ से मैला ढोने का काम किया जाना एक गंभीर चिंता का विषय है। भारत सरकार के द्वारा इसके समाधान के लिये कई नीतियाँ बनाई गई हैं, लेकिन अब तक कुछ क्षेत्रों में मैला ढोने के मामले देखे जा रहे हैं।

आदिवासियों के मानवाधिकारों से समझौता तब किया जाता है, जब उन्हें पशुओं के संरक्षण हेतु संरक्षित क्षेत्र से विस्थापित कर दिया जाता है।

स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार ,भारत के संविधान के (भाग 3 के अनुच्छेद 21 के ) जीवन के अधिकार के तहत आता है। शहरीकरण और औद्योगीकरण की वजह से प्रदूषण में हो रहे वृद्धि के कारण मानव अधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है।

महिलाओं के मानवाधिकार:-

हमारे समाज में महिलाओं को कमज़ोर समझा जाता है, और अक्सर उन्हें बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित कर दिया जाता है। महिलाओं को समाज में हिंसा का शिकार होना पड़ता है। चाहे वह घर की चार दीवारी के अंदर हों या कार्यस्थल पर।

अफगानिस्तान में मृत्यु के आरोप में जब भी कोई लड़की को गिरफ्तार किया जाता है, तो जबरन उसके कौमार्य की जांच की जाती है।

कैदियों के अधिकार:-

जबरन श्रम, शारीरिक शोषण/यातना, पुलिस द्वारा शक्ति का दुरुपयोग, हिरासत में बलात्कार, अमानवीय व्यवहार ,भोजन की खराब गुणवत्ता, पानी की व्यवस्था की कमी और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नोट किये गए अन्य मुद्दों सहित कैदियों के सबसे मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

हाल के दिनों में भारत का सर्वोच्च न्यायालय कैदियों के मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ बहुत सतर्क रहा है।

शासन में भ्रष्टाचार:-

भ्रष्टाचार, कानून के शासन, लोकतंत्र और मानव अधिकारों के लिये खतरा है।यह सुशासन, निष्पक्षता तथा सामाजिक न्याय को कमज़ोर करता है। प्रतिस्पर्धा को विकृत कर देता है।आर्थिक विकास में बाधा डालता है, एवं लोकतांत्रिक संस्थानों की स्थिरता और समाज की नैतिक नींव को खतरे में डालता है।

अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इसका इस्तेमाल करने सहित आतंकवाद विरोधी कानून के प्रावधानों के दुरुपयोग की कई संभावनाएँ पैदा हुई हैं।

मानवाधिकार क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?

Manav adhikar kya hai

 

✓मानवाधिकार किसी व्यक्ति को दुर्व्यवहार या भेदभाव से  संरक्षण प्रदान करता है, क्योंकि सभी को शारीरिक और बौद्धिक रूप से विकसित होने का समान अवसर मिलना चाहिये।

✓सामाजिक अन्याय और समाज में प्रचलित  कुप्रथाओं के खिलाफ व्यक्ति बोल सकते हैं।

✓मानवाधिकार गारंटी देता है कि लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं को संबोधित किया जाना चाहिए।

✓भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मानवाधिकारों के माध्यम से प्रचारित की जाती है।

✓धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करना मानव अधिकारों द्वारा संभव है।

✓मानव अधिकारों के द्वारा सरकार की जवाबदेही के लिये एक समान मानदंड प्रदान किया जाता है।

मानव अधिकारों की संरक्षण के लिए उपाय 

(1).समय पर प्रभावी सेवा वितरण सुनिश्चित करना:-

शासन में भ्रष्टाचार, मानवाधिकारों के उल्लंघन के पीछे एक बड़ा कारक है, क्योंकि यह सरकार की नीति तथा कार्यक्रम का समय पर प्रभावी कार्यान्वयन नहीं होने देता है। कुशल प्रशासन एवं निगरानी द्वारा सेवाओं की समय पर और कुशल डिलीवरी की गारंटी दी जानी चाहिये।

(2)•अविकसित और विकासशील देशों पर ध्यान देना:-

अविकसित एवं विकासशील देशों में अधिकांश मानव अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। इसलिये विकासशील और अविकसित राष्ट्रों को मानव अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े उपायों को विकसित करने और उसे बनाए रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिये।

भारत के मामले में पूरे देश में मानवाधिकारों के हनन का अधिक प्रभावी प्रहरी बनने के लिये NHRC को काफी हद तक एक नया रूप प्रदान किया जाना चाहिये।

यदि आयोग की सिफारिशों को कानूनी रूप से बाध्यकारी बना दिया जाए तो NHRC की प्रभाव बढ़ जाएगी। यदि भारत में मानवाधिकारों की स्थिति में सुधार और मजबूती लाना है, तो राज्य व गैर-राज्य के  संस्थाओं को सहयोग एवं नेतृत्व करना चाहिये।

पुराने कानूनों और प्रावधानों को वर्तमान परिस्थितियों की नवीनतम मांग के अनुसार संरेखित किया जाना चाहिए।

उम्मीद है कि Manav adhikar kya hai पोस्ट आपको पसंद आई होगी। ऐसे ही और जानकारियां हासिल करने के लिए इस वेबसाइट के साथ हमेशा बने रहे।

अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।💐💐

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