Maulik kartavya kis bhag mein hai : मौलिक कर्तव्य का वर्णन कीजिए

दोस्तों ,आपको जानकारी होगी कि भारतीय संविधान के भाग 3 में मौलिक अधिकार दिया गया हैं तो वहीं भाग 4 (क) में मौलिक कर्तव्य भी दिए गए हैं। हम सभी को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी जानकारी होनी चाहिए ।आप इस (Maulik kartavya kis bhag mein hai : मौलिक कर्तव्य का वर्णन कीजिए ) पोस्ट के माध्यम से भारतीय नागरिक होने के नाते आपका क्या कर्तव्य है इसके बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

संविधान का संक्षिप्त परिचय

भारत में संविधान ही सर्वोच्च विधान है। भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा पारित हो गया था। 26 जनवरी 1950 को संपूर्ण रूप से लागू कर दिया गया था।

भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां एवं 25 भाग हैं। हालांकि मूल संविधान में 395 अनुच्छेद , 8 अनुसूचियां एवं 22 भाग ही थे। लेकिन वर्तमान में बढ़कर 12 अनुसूचियां एवं 25 भाग हो गए हैं।

भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य रूस (संयुक्त राष्ट्र संघ )के संविधान से प्रेरित है ।

भारतीय संविधान ने अपने देश की आवश्यकता के अनुसार विश्व के अधिकांश प्रमुख संविधानों को पढ़ने के पश्चात उसके सर्वोत्तम विशेषताओं को अपने में समाहित किया है।हालांकि भारत का संविधान को कई देशों से उधार लिया हुआ कहा जाता है।

लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। क्योंकि संविधान निर्माताओं के द्वारा विश्व के संविधानों को पढ़ने के पश्चात उनके प्रमुख विशेषताओं को अपने भारत के परिस्थितियों के अनुसार संशोधित करने के पश्चात ही अपने संविधान में शामिल किया गया है।

हमारे संविधान में भारत के संसदीय स्वरूप की विस्तृत व्यवस्था की गई है। भारतीय संविधान की संरचना संघीय है।भारतीय संविधान इसकी प्रस्तावना के साथ शुरू होता है।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में इसके आदर्श उद्देश्य एवं बुनियादी सिद्धांत शामिल है। भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं इन उद्देश्यों से ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से विकसित हुई है, जो की प्रस्तावना से प्रवाहित होती है।

भारत का संविधान अद्वितीय है। इसमें अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को अनुकूलित करने की क्षमता व्याप्त है। भारतीय संविधान एकात्मक और संघात्मक दोनों का मिश्रित स्वरूप है।

आवश्यकता के अनुसार अपने आप को परिवर्तित करते रहता है। इसीलिए तो भारत के संविधान को जीवंत संविधान भी कहा जाता है।

दोस्तों, आइए अब भारतीय नागरिक होने के नाते संविधान के अनुसार हमारा क्या कर्तव्य है ?इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

दोस्तों अपनी अधिकारों की बात तो हर कोई करता है परंतु हम सभी को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के बारे में भी सोचना चाहिए। हम सब को भारतीय नागरिक होने के नाते अपने देश के गौरव को बढ़ाने एवं अपने देश में सुख- शांति- समृद्धि में वृद्धि करने हेतु पूरे लगन के साथ कार्य करना चाहिए।

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मौलिक कर्तव्य

मूल संविधान में नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान नहीं किया गया था। मूल कर्तव्य को स्वर्ण सिंह समिति के सिफारिश पर 42 वां संविधान संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा शामिल किया गया है।

यह भारत के सभी नागरिकों के लिए 10 मौलिक कर्तव्यों की एक सूची प्रदान किया है। बाद में 86 वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से भारतीय संविधान में एक और मूल कर्तव्य को जोड़ा गया। अधिकार लोगों को गारंटी के रूप में दिए जाते हैं,जबकि कर्तव्य ऐसे दायित्व हैं, जिन्हें पूरा करने की अपेक्षा प्रत्येक नागरिकों से जाती है।

हालांकि ,राज्य के नीति- निर्देशक सिद्धांतों की तरह मौलिक कर्तव्य भी प्रकृति में न्यायोचित है। नीति निर्देशक सिद्धांत का उलंघन या अनुपालन न होने पर किसी प्रकार की कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती है। भारतीय संविधान में वर्तमान में 11 मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है।

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भारतीय संविधान में वर्णित 11 मौलिक कर्तव्य

(1). समस्त भारतीय नागरिकों को संविधान का आदर सम्मान करना होगा एवं साथ ही उसको सर्वमान्य मानकर उसका पालन करना होगा। तिरंगा व राष्ट्रगान का आदर- सम्मान करना होगा।

(2).जिन महापुरुषों ने हमें आजादी दिलाई एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जिन्होंने अपना बलिदान दिया है, हमें उनका आदर व सम्मान करना होगा।

(3). राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता की रक्षा करना और उसका आदर एवं गौरवपूर्ण सम्मान करना।

(4). राष्ट्र की विचारधारा और राष्ट्र के आदर्श मूल्यों की रक्षा करना।

(5) भारतीय संस्कृति का संरक्षण कर उसे बढ़ावा देना।

(6). नागरिकों को एक समान आदर एवं सम्मान देना तथा उनके अधिकारों का सम्मान करना।

(7). प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करना एवं इसकी वृद्धि के लिए प्रयत्न करना।

(8). वैज्ञानिक मानदंडों को अपनाना एवं राष्ट्र के विकास के लिए ज्ञान के क्षेत्र में वृद्धि करना।

(9). सार्वजनिक संपत्ति की संरक्षण करना एवं उसे हानि नहीं पहुंचाना।

(10). राष्ट्र के विकास हेतु सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देना।

(11). माता-पिता द्वारा अपने बच्चों को प्राथमिक निःशुल्क शिक्षा प्रदान करवाना।

तो भारतीय संघ तो दोस्तों भारतीय संविधान में वर्णित यह 11 मूल कर्तव्य हैं जिसका पालन करना हमारा परम कर्तव्य है हमें इन कर्तव्यों का पालन अवश्य करना चाहिए।

मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्तव्य में अंतर

 मौलिक अधिकार लोगों को गारंटी के रूप में दिए जाते हैं।जबकि कर्तव्य ऐसे दायित्व हैं, जिन्हें पूरा करने की अपेक्षा प्रत्येक नागरिकों से जाती है।

हालांकि, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों की तरह मौलिक कर्तव्य भी प्रकृति में न्यायोचित है। जिस प्रकार से नीति निर्देशक सिद्धांत का उलंघन या अनुपालन न होने पर किसी प्रकार की कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती है, ठीक उसी प्रकार से कर्तव्यों का उलझन करने या अनुपालन न करने पर भी प्रकार की कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

तो दोस्तों, इस Maulik kartavya kis bhag mein hai पोस्ट में दी गई जानकारियां आपको अच्छी लगी होगी। ऐसे ही और जानकारी प्राप्त करने के लिए इस वेबसाइट को सब्सक्राइब करें तथा टेलीग्राम ग्रुप को भी ज्वाइन कर लें। इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ अवश्य शेयर करें ताकि उन्हें भी इस पोस्ट का लाभ प्राप्त हो सके।

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अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।💐💐

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