Maulik kartavya kya hai : मौलिक कर्तव्य किस देश से लिया गया है

दोस्तों, मूल भारतीय संविधान में प्रस्तावना ,395 अनुच्छेद ,8 अनुसूचियां एवं 22 भाग शामिल था। भारत के मूल संविधान में मौलिक कर्तव्यों को शामिल नहीं किया गया था। इसे बाद में संविधान संशोधन के द्वारा भारतीय संविधान में शामिल किया गया है। maulik kartavya kya hai पोस्ट के माध्यम से आप मौलिक कर्तव्यों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

भारतीय संविधान का संक्षिप्त परिचय

भारत के संविधान में प्रस्तावना ,395 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां एवं 25 भाग हैं। हालांकि मूल संविधान में प्रस्तावना ,395 अनुच्छेद , 8 अनुसूचियां एवं 22 भाग ही थे। परंतु वर्तमान में बढ़कर 12 अनुसूचियां एवं 25 भाग हो गए हैं।

हमारे संविधान में भारत के संसदीय स्वरूप के बारे में विस्तृत व्यवस्था की गई है। भारतीय संविधान की संरचना संघीय है।भारतीय संविधान इसकी प्रस्तावना के साथ शुरू होता है।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में इसके आदर्श उद्देश्य एवं बुनियादी सिद्धांत शामिल है। भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं इन उद्देश्यों से ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से विकसित हुई है, जो की प्रस्तावना से प्रवाहित होती है।

भारतीय संविधान ने अपने देश की आवश्यकता के अनुसार विश्व के अधिकांश प्रमुख संविधानों को पढ़ने के पश्चात उसके सर्वोत्तम विशेषताओं को अपने में समाहित किया है।हालांकि भारत का संविधान को कई देशों से उधार लिया हुआ कहा जाता है।

लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, क्योंकि भारतीय संविधान निर्माताओं ने विश्व के संविधानों को पढ़ने के पश्चात उनके प्रमुख विशेषताओं को अपने भारत के परिस्थितियों के अनुसार संशोधित करने के पश्चात ही अपने संविधान में शामिल किया है।

इसलिए यह कहना कि भारत का संविधान केवल उधार का संविधान है, या नकल मात्र है, उचित नहीं होगा।

हमारे देश का संविधान अद्वितीय है। इसमें अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को अनुकूलित करने की क्षमता व्याप्त है। भारतीय संविधान एकात्मक और संघात्मक दोनों का मिश्रित स्वरूप है।

आवश्यकता के अनुसार अपने आप को परिवर्तित करते रहता है। इसीलिए तो भारत के संविधान को जीवंत संविधान भी कहा जाता है। दुनिया भर में ऐसा संविधान कहीं भी देखने को नहीं मिलता है।

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तो दोस्तों, आइए अब भारतीय संविधान में वर्णित मूल कर्तव्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं:-

(11). मौलिक कर्तव्य

भारत के मूल संविधान में नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान नहीं किया गया था। मूल कर्तव्य को स्वर्ण सिंह समिति के सिफारिश पर 42 वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से शामिल किया गया है।

यह भारत के सभी नागरिकों के लिए 10 मौलिक कर्तव्यों की एक सूची प्रदान किया है। बाद में 86 वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के द्वारा भारतीय संविधान में एक और मूल कर्तव्य को जोड़ा गया।

 भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य संयुक्त राष्ट्र संघ से प्रेरित होकर शामिल किया गया है।

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मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्तव्य में अंतर

 मौलिक अधिकार लोगों को गारंटी के रूप में दिए जाते हैं।जबकि कर्तव्य ऐसे दायित्व हैं, जिन्हें पूरा करने की अपेक्षा प्रत्येक नागरिकों से जाती है।

हालांकि राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों की तरह मौलिक कर्तव्य भी प्रकृति में न्यायोचित है। जिस प्रकार से नीति निर्देशक सिद्धांत का उलंघन या अनुपालन न होने पर किसी प्रकार की कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती है, ठीक उसी प्रकार से कर्तव्यों का उलझन करने या अनुपालन न करने पर भी प्रकार की कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

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भारतीय संविधान में वर्तमान में 11 मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है:- 

(1). समस्त भारतीय नागरिकों को संविधान का आदर सम्मान करना होगा एवं साथ ही उसको सर्वमान्य मानकर उसका पालन करना होगा। तिरंगा व राष्ट्रगान का आदर- सम्मान करना होगा।

(2).जिन महापुरुषों ने हमें आजादी दिलाई एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जिन्होंने अपना बलिदान दिया है, उनका आदर व सम्मान करना ।

(3). राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता की रक्षा करना और उसका आदर एवं गौरवपूर्ण सम्मान करना।

(4). राष्ट्र की विचारधारा और राष्ट्र के आदर्श मूल्यों की रक्षा करना।

(5) भारतीय संस्कृति का संरक्षण कर उसे बढ़ावा देना।

(6). नागरिकों को एक समान आदर एवं सम्मान देना तथा उनके अधिकारों का सम्मान करना।

(7). प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करना एवं इसकी वृद्धि के लिए प्रयत्न करना।

(8). वैज्ञानिक मानदंडों को अपनाना एवं राष्ट्र के विकास के लिए ज्ञान के क्षेत्र में वृद्धि करना।

(9). सार्वजनिक संपत्ति की संरक्षण करना एवं उसे हानि नहीं पहुंचाना।

(10). राष्ट्र के विकास हेतु सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देना।

(11). माता-पिता द्वारा अपने बच्चों को प्राथमिक निःशुल्क शिक्षा प्रदान करवाना।

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FAQ :- पोस्ट से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न- उत्तर

(1). मौलिक कर्तव्य क्या है?

उत्तर:- भारत के प्रत्येक नागरिक का यह परम कर्तव्य है ,कि वह संविधान का पालन करें ।वह उसके आदर्श संस्थाओं राष्ट्रगान एवं राष्ट्रध्वज का आदर्श सम्मान करें। स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शो को हृदय में हमेशा संजोय रखें, एवं पालन करें। भारत के प्रभुता एकता एवं अखंडता की रक्षा करें।

(2). भारतीय संविधान में मूल कर्तव्यों की संख्या कितनी है?

उत्तर:- भारतीय संविधान में मूल कर्तव्यों की संख्या 11 है ।86वां संविधान संशोधन 2002, के माध्यम से 11 वां मूल कर्तव्य को शामिल किया गया था।

(3). मौलिक कर्तव्य कहां से लिया गया है?

उत्तर:- भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य रूस (संयुक्त राष्ट्र संघ )के संविधान से प्रेरित है । मूल संविधान में मौलिक कर्तव्य का प्रावधान नहीं किया गया था। इस 42 वां संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के माध्यम से स्वर्ण सिंह समिति के सिफारिश पर संविधान के भाग- 4 (क) में शामिल किया गया है।

(4). संविधान के आर्टिकल -1 में क्या है?

उत्तर:- भारतीय संविधान का आर्टिकल एक यानी अनुच्छेद एक कहता है कि भारत राज्यों का संघ होगा संविधान में भारत और इंडिया को एक ही माना गया है। हमारे देश को अंग्रेजी में इंडिया एवं हिंदी में भारत कहा जाता है।

(5). भारतीय संविधान में भारत का क्या नाम है?

उत्तर:- भारतीय संविधान के अनुच्छेद एक के अनुसार इंडिया जो कि भारत है, राज्यों का एक संघ होगा। यह प्रावधान दो बातों को स्पष्ट करता है। पहला हमारे देश का नाम एवं दूसरा भारत में राजव्यवस्था के प्रकार। हमारे देश के भारत और इंडिया दोनों नामों को संविधान में उल्लेख किया गया है

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अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।💐💐

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