NR Narayana Murthy : नारायण मूर्ति, द्वारा शेयर किया गया अपने 30 वर्ष पुराना अनुभव

दोस्तों, इंफोसिस के को फाउंडर NR Narayana Murthy के द्वारा 30 वर्ष पुराना अपने अनुभवों को शेयर करते हुए बताया गया कि किसी भी देश को यदि समृद्ध करना है, तो कामकाजी घंटे और उत्पादकता को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

इनका कहना है कि जो भी देश आज समृद्ध अवस्था में आए हैं, वह सभी कामकाजी घंटे और उत्पादकता पर ध्यान केंद्रित कर के ही ऐसी उपलब्धि प्राप्त कर पाए हैं। अपने देश से या किसी व्यक्ति को अपने जीवन से यदि गरीबों को दूर हटाना है, तो इसका एकमात्र उपाय कड़ी मेहनत ही है।

इंफोसिस के को फाउंडर नारायण मूर्ति ने कामकाजी घंटे से संबंधित हाल ही में एक नया बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि एक समय था जब उन्होंने एक सप्ताह में स्वयं 85 से 90 घंटों तक लगातार काम किया करते थे।

सॉफ्टवेयर दिग्गज इंफोसिस के संस्थापक रहे एन आर न्यायमूर्ति ने दफ्तर में अपने कामकाजी घंटे पर एक नया बयान दिए हैं।। देश के चुनिंदा उद्यमियों में चुने जाने वाले नारायण मूर्ति के द्वारा हाल ही में कहा गया की जो भी देश समृद्ध हुआ है, उसने कड़ी मेहनत से ऐसा कर पाया है।

उन्होंने कहा की मैं इंफोसिस में काम करने के दौरान कई बार 1 हफ्ते में 85 से 90 घंटे तक काम किया करते थे।उन्होंने कहा “बर्बादी नहीं है “।उन्होंने इस बयान को देते हुए कहा की इंफोसिस में काम करने के दौरान ऐसा कई बार हुआ था।

लगभग 30 वर्ष पुराना अपने अनुभवों को याद करते हुए नारायण मूर्ति ने कहा कि उन्होंने अपनी कंपनी की स्थापना के समय स्वयं ही सप्ताह में 70 घंटे या कभी-कभी तो इससे भी अधिक घंटे तक लगातार काम किया करते थे।

अब ताजा घटनाक्रम में इकोनामिक टाइम्स के साथ एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि वर्ष 1994 तक वह एक सप्ताह में 85 से 90 घंटे तक लगातार काम करते रहते थे।

उन्होंने यह कहा कि सुबह 6:20 से ऑफिस पहुंचने के बाद रात्रि 8:30 पर ऑफिस से निकला करते थे।उस समय के दौरान एक सप्ताह में 6 दिन काम करते थे।

नारायण मूर्ति ने यह बात दोहराई कि मेरे 40 से अधिक साल के पेशेवर जीवन के दौरान उन्होंने एक हफ्ते में लगभग 70 घंटे तक लगातार काम किया हुआ है। उनका काम सप्ताह के 6 दिनों तक लगातार चलता था। वर्ष 1994 तक मैं कम से कम सप्ताह में 85 से 90 घंटे तक तो काम कर ही लिया करते थे।

बयान देते समय उन्होंने यह भी कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें यह सिखाया था की “गरीबी से बचने का एकमात्र उपाय है बहुत कड़ी मेहनत करना”।

हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि कामकाजी घंटे इतने लंबे तभी होते हैं, जब व्यक्ति को प्रत्येक कामकाजी घंटे से अच्छे परिणाम और उत्पादकता मिल रहा हो।

मैं आपको बता दूं कि इससे पहले अक्टूबर महीने में इंफोसिस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी मोहनदास पाई के साथ बातचीत के दौरान एन आर नारायण मूर्ति का 70 घंटे तक काम करने वाला बयान सुर्खियों में बना हुआ था।

इंफोसिस के को फाउंडर न्यायमूर्ति ने यह कहा कि यदि भारत, चीन और जापान जैसे सबसे तेजी से बढ़ रहे देश के साथ प्रतिस्पर्धा करना चाहता है, तो उसे कामकाजी घंटे के साथ-साथ कार्य उत्पादकता को भी बढ़ाने की जरूरत है।इस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ।

उन्होंने यह भी कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात जर्मनी और जापान के लोगों ने अपने देश के विकास पर अपने ज्ञान को केंद्रित किया। अर्थव्यवस्था के तेज विकास के लिए इन देशों में कई सप्ताहों तक अतिरिक्त घंटा में काम किया गया ।

एन आर नारायण के द्वारा यह भी कहा गया कि भारत में युवा वर्ग भी देश के मालिक हैं ।सभी हमारी अर्थव्यवस्था के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करते रहते हैं ।

यदि हमें अपने देश का विकास के गति को तेज करना है। यदि हमें अपने देश को समृद्ध करना है ,तो हमें मिलकर प्रयास करना चाहिए। बिना मेहनत किए हम अपने देश को समृद्ध नहीं कर सकते हैं। हम सभी के मेहनत हमारे देश को समृद्ध करने में कारगर हो सकता है।

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