Power of swastik symbol : स्वास्तिक किस चीज से बनाएं, स्वास्तिक किस दिन बनाना चाहिए , जानें यहां विस्तार से जानकारी

दोस्तों, स्वास्तिक चिन्ह को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। हिंदू धर्म में कोई भी पूजा बिना स्वास्तिक चिन्ह के नहीं की जाती है। हर पूजा पाठ की शुरुआत स्वास्तिक चिन्ह बनाने से ही होती है। Power of swastik symbol पोस्ट के माध्यम से स्वास्तिक के उस पावर के बारे में जानेंगे, जो हमारे कष्टों का अंत कर देता है, एवं हम सभी के जीवन में सुख- शांति- समृद्धि लाता है।

दोस्तों आप जानते होंगे कि हिंदू धर्म में स्वास्तिक चिन्ह को शुभ और मंगल भावों का प्रतीक माना जाता है। प्रत्येक पूजा पाठ की शुरुआत स्वास्तिक चिन्ह से की जाती है। हिंदू धर्म में स्वास्तिक चिन्ह के बिना कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है।

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तो आइए अब स्वास्तिक चिन्ह के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें:-

स्वास्तिक

स्वास्तिक शब्द को ” ‘सु ‘एव ‘अस्ति’ ” का मिश्रण योग माना जाता है। जहां ‘सु’ का अर्थ है शुभ एवं ‘अस्ति’ का अर्थ होना होता है। अर्थात स्वास्तिक का अर्थ हुआ शुभ हो, कल्याण हो ।दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि स्वास्तिक का अर्थ कुशल या कल्याण होता है।

स्वास्तिक चिन्ह का प्रयोग घर के वास्तु दोष को ठीक करने के लिए किया जाता है। स्वास्तिक के प्रयोग करने से घर की नकारात्मक ऊर्जाएं बाहर चली जाती हैं।

जानकारी के लिए मैं आपको बता दूं कि स्वास्तिक चिन्ह के कुछ उपाय करके आप अपनी जिंदगी को खुशहाल बना सकते हैं। अनेक प्रकार की समस्याओं से छुटकारा पाकर आप अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं।

वास्तु दोष दूर करने के लिए स्वास्तिक चिन्ह का उपाय

आप अपने घर से सभी प्रकार के वास्तु दोष को दूर करना चाहते हैं, तो अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ अष्ट धातु एवं ऊपर मध्य में तांबे का स्वास्तिक लगाना चाहिए ।

इसके अतिरिक्त यदि आप पंच धातु का स्वास्तिक बनवाकर प्राण प्रतिष्ठा करने के पश्चात चौखट पर लगाते हैं, तो इससे भी आपके घर से सभी प्रकार के वास्तु दोष दूर हो जाएंगे एवं आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगेगा, जिससे आपके घर में सुख शांति समृद्धि की बरसात होने लगेगी।

व्यापार में कामयाबी के लिए स्वास्तिक चिन्ह का उपाय

यदि आपको व्यापार में बार-बार घाटे हो रहे हैं, या आपकी व्यापार अच्छी नहीं चल रही है, तो आप इस उपाय को करके अपनी व्यापार में तेजी ला सकते हैं।

इसके लिए आपको  7 गुरुवार के दिन ईशान कोण को गंगाजल से धोना होगा। इसके पश्चात वहां पर सूखी हल्दी से स्वास्तिक चिन्ह बना ले एवं उसे चिन्ह की पंचोपचार पूजा करें।फिर वहां आधा तोला गुड़ का भोग लगाएं। वही वर्क प्लेस पर उत्तर दिशा में हल्दी का स्वास्तिक चिन्ह भी बना दें।

ऐसा करने से आपको शुभ फल की प्राप्ति होगी, एवं जल्द ही व्यापार आपका तेज गति से चलने लगेगा। हो रहे नुकसान में अब आपको परिवर्तन दिखेगा और नुकसान के जगह फायदे होने लगेंगे।

हर मनोकामना पूर्ण करने के लिए स्वास्तिक चिन्ह का उपयोग

दोस्तों यदि आप अपनी मनोकामनाएं पूरी करना चाहते हैं, तो स्वास्तिक चिन्ह का यह उपाय अवश्य अपनाएं। आप देवस्थान पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसके ऊपर पंच धान्य या एक दीपक जलाकर रखें। ऐसा करने से आपको चमत्कारिक असर दिखाई पड़ेगी। आपकी हरेक मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएगी।

नींद अच्छी आने के लिए स्वास्तिक चिन्ह का उपाय

काफी लोगों की यह समस्या होती है, कि रात को उन्हें अच्छी नींद नहीं आती है ।कितने लोग तो रात्रि के समय बहुत बेचैनी महसूस करते हैं।

यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो आप इस समस्या को दूर करने के लिए सोने से पूर्व स्वास्तिक को तर्जनी से बनाकर सो जाएं। इस उपाय को करने से आपको रात्रि के समय नींद अच्छी आएगी ।बेचैनी आपकी शांत हो जाएगी।

FAQ:-पोस्ट से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न- उत्तर

(1).स्वास्तिक किस दिन बनाना चाहिए?

उत्तर:- स्वास्तिक का चिन्ह तो वैसे कोई भी शुभ काम या पूजा को शुरू करने से पहले अवश्य बनाना चाहिए। लेकिन यदि आपके घर के बाहर कोई खंभा या पेड़ है, तो इससे आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सकती है। इसलिए आप प्रतिदिन अपने घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। इससे आपके घर से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाएगी एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।

(2).स्वास्तिक का महत्व क्या है?

उत्तर:-हिंदू धर्म में स्वास्तिक चिन्ह को सुभता का प्रतीक माना जाता है। इसे बनाने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर में सुख शांति समृद्धि बनी रहती है। शास्त्र के अनुसार यदि आप घर के मेन गेट पर हमेशा हल्दी से ही स्वास्तिक चिन्ह बनाते हैं, तो आपके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होगी एवं आपके घर में कभी कोई बीमारी प्रवेश नहीं करेगी।

(3).दरवाजे पर स्वास्तिक कैसे बनाएं?

उत्तर:- हिंदू धर्म में स्वास्तिक चिन्ह को सुभता का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म के ऋग्वेद में स्वास्तिक को सूर्य का प्रतीक भी माना गया है। इसकी चार भुजाएं चार दिशाओं को संकेत करता है। यह चिन्ह सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के ऊर्जा का प्रवाह करता है। इसलिए बहुत जरूरी हो जाता है कि स्वास्तिक चिन्ह को सही तरीके से और सही दिशा में ही बनाया जाए।

(4).स्वास्तिक चिन्ह कहाँ से लिया गया है?

उत्तर:- स्वास्तिक चिन्ह का उद्भव एशिया में सबसे पहले हुआ था।

भारत देश के सिंधु घाटी सभ्यता में भी 300 ईसा पूर्व में स्वास्तिक चिन्ह के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

(5). उल्टा स्वास्तिक कैसे बनाते हैं?

उत्तर:- घर की पूजा स्थल या मंदिर में स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर बनाकर उस पर इष्ट देव की प्रतिमा रखकर पूजा करने से देवता तुरंत प्रसन्न होते हैं, और मनचाहा आशीर्वाद देते हैं। परंतु यदि आपके घर में कलह- क्लेश हमेशा बनी रहती है, तो इसे दूर करने के लिए आप उल्टा स्वास्तिक का चिन्ह अर्थात सीधा स्वास्तिक के ठीक विपरीत स्वरूप में बनाएं। ऐसा करने से आपके घर से कलह-क्लेश दूर हो जाएंगे और शांति का आगमन होगा।

(6).स्वास्तिक कैसे बनाया जाता है?

उत्तर:- कुछ लोग सबसे पहले प्लस का साइन बनाते हैं, एवं उसके पश्चात स्वास्तिक की अन्य भुजाएं बनाते हैं। परंतु इस तरह से बनाए गए स्वास्तिक को शुभ नहीं माना जाता है। स्वास्तिक का चिन्ह बनाने से पहले दाएं भाग बनाएं एवं इसके पश्चात बाएं भाग बनाएं। इस तरह से बने स्वास्तिक को शुभ माना जाता है, और यह शुभ फलदायक होता है।

(7).स्वास्तिक बनाने का सही तरीका बताएं?

उत्तर:- स्वास्तिक चिन्ह हिंदू धर्म में अति शुभ माना जाता है। कोई भी पूजा पाठ करने से पूर्व स्वास्तिक चिन्ह अवश्य बनाए जाते हैं। अपने घर के मेन गेट पर हल्दी से स्वास्तिक चिन्ह बनाने से नकारात्मक ऊर्जाएं दूर हो जाती है। स्वास्तिक चिन्ह सही तरीके से बनाने के लिए सबसे पहले दाएं भाग बनाएं एवं इसके पश्चात बाएं भाग। इस तरह से बनाए गए स्वास्तिक चिन्ह को शुभ माना जाता है, और यह शुभ फलदायक होता है।

(8).स्वास्तिक चिन्ह किस सभ्यता की देन है?

उत्तर:- स्वास्तिक चिन्ह सिंधु घाटी सभ्यता की देन है। सिंधु घाटी के खुदाई के दौरान स्वास्तिक चिन्ह प्राप्त हुआ ऐसा माना जाता है ,कि हड़प्पा सभ्यता के लोग भी सूर्य भगवान की पूजा को महत्व देते थे।

(9).उल्टा स्वास्तिक का मतलब क्या होता है?

उत्तर:- उल्टा स्वास्तिक बनाने से दूर होती है, हर समस्या एवं अखंड सौभाग्य एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती है ।उल्टा स्वास्तिक बनाने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं, एवं कलह- क्लेश भी दूर हो जाते हैं। ध्यान देने योग्य बात है कि उल्टा स्वास्तिक बनाने के भी एक सही तरीका है,यदि इस तरीके को न अपनाया जाए तो फायदे की जगह नुकसान भी हो सकते हैं।

(10).स्वास्तिक चिन्ह किसकी देन है?

उत्तर:-स्वास्तिक चिन्ह सिंधु घाटी सभ्यता की देन है। सिंधु घाटी के खुदाई के दौरान स्वास्तिक चिन्ह प्राप्त हुआ ऐसा माना जाता है ,कि हड़प्पा सभ्यता के लोग भी सूर्य भगवान की पूजा को महत्व देते थे।

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Disclaimer:- दोस्तों इस Power of swastik symbol पोस्ट में दी गई जानकारियां सिर्फ धार्मिक आस्थाओं एवं मान्यताओं पर आधारित है। इसलिए यह वेबसाइट किसी भी प्रकार की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। इसलिए आप कुछ भी अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से एक बार आवश्यक सलाह अवश्य ले लें।

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