Pradosh vrat katha 2023 in hindi : प्रदोष व्रत कथा, प्रदोष व्रत में क्या-क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, जानें यहां

दोस्तों, जिस प्रकार से प्रत्येक माह में दो एकादशी होती है, उसी प्रकार प्रत्येक माह में दो त्रयोदशी भी आता है। त्रयोदशी को ही प्रदोष व्रत किया जाता है। Pradosh vrat katha 2023 in hindi पोस्ट में इसी प्रदोष व्रत की कथा के बारे में वर्णन किया गया है। इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

दोस्तों, हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विष्णु भगवान से तो वहीं त्रयोदशी तिथि को भोलेनाथ से जोड़ा गया है। इन दोनों ही व्रत से चंद्र दोष दूर होता है।

तो आइए जानते हैं प्रदोष व्रत कथा क्या है? इस दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए?

प्रदोष व्रत कथा 

प्रदोष को प्रदोष कहने के पीछे एक कहानी है। संक्षेप में बताया जाए तो चंद्र एक समय क्षय रोग से ग्रसित हो गये था, जिसके चलते उन्हें मृत्यु तुल्य कष्ट हो रहा था।

भगवान शिव ने उसके दोष का निवारण करके उन्हें त्रयोदशी के दिन पुनर्जीवन प्रदान किया था। अतः इसी लिए इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा।

हालांकि प्रत्येक प्रदोष की व्रत की कथा अलग-अलग होती है। स्कंद पुराण में प्रदोष व्रत के महामात्य का वर्णन किया गया है।

इस व्रत को करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इसमें एक विधवा ब्राह्मणी और शांडिल्य ऋषि की कथा के माध्यम से इस व्रत की महिमा का वर्णन किया गया है।

पद्म पुराण की एक कथा के अनुसार चंद्र देव जब अपने 27 पत्तियों में से केवल रोहिणी से ही ज्यादा प्रेम करते थे, तथा बाकी 26 पत्तियों को प्रेम नहीं करते और उनका अनादर करते थे।

इसलिए उन्हें श्राप मिला।श्राप के कारण चंद्र देव कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गए। ऐसे में अन्य देवता मिलकर चंद्र देव को सलाह दिया कि शिवलिंग की स्थापना कर शिवजी की आराधना करें।

ऐसा करने से शिवजी प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए तथा कुष्ठ रोग से भी ठीक कर दिए। चंद्र देव का एक नाम सोम भी है।

चंद्र देव ने भगवान शिव को ही अपना नाथ स्वामी मानकर यहां तपस्या की थी। इसलिए इस शिवलिंग स्थापित किए गए स्थान को सोमनाथ कहा गया।

व्रत के दिन क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

✓प्रदोष व्रत में केवल हरी मूंग का सेवन करना चाहिए, क्योंकि हरा मूंग पृथ्वी तत्व है तथा यह मंदाग्नि को शांत रखता है।

✓ प्रदोष‌ व्रत में लाल मिर्च और चावल, सादा नमक नहीं खाना चाहिए। हालांकि फल ग्रहण कर सकते हैं।

प्रदोष व्रत की विधि

प्रदोष व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले ही उठ जाना चाहिए।

• नित्य कर्म से निवृत होने के पश्चात सफेद रंग के कपड़े धारण करें ।

• पूजा घर को साफ और शुद्ध कर लें।

• गाय के गोबर से पुताई करके मंडप तैयार करें।

• इस मंडप के नीचे पांच अलग-अलग रंगों का प्रयोग करके रंगोली बनाइए।

• फिर उत्तर-पूरब दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं, तथा शिवजी की पूजा करें। पूरे दिन किसी प्रकार का अन्न ग्रहण ना करें।

FAQ:-  पोस्ट से संबंधित प्रश्न-उत्तर

(1). प्रदोष व्रत के नियम क्या है?

उत्तर:- प्रदोष व्रत के दिन निर्जला उपवास करना चाहिए। शाम के समय में शिव शंकर की पूजा अर्चना करने के पश्चात फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। ध्यान रहे की प्रदोष व्रत के दिन नमक का सेवन नहीं करना है। साथ ही इस व्रत के दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन भी करना चाहिए।

(2). प्रदोष व्रत में शाम को क्या खाया जाता है?

उत्तर:- प्रदोष व्रत में केवल हरी मूंग का सेवन करना चाहिए। क्योंकि हरा मूंग पृथ्वी तत्व है, तथा यह मंदाग्नि को शांत करता है। प्रदोष व्रत में लाल मिर्च, अन्न, चावल तथा सादा नमक ग्रहण नहीं करना चाहिए। हालांकि इस व्रत के दिन फल ग्रहण किया जा सकता है।

(3). कितने प्रदोष व्रत रखनी चाहिए?

उत्तर:- कहा जाता है कि प्रदोष व्रत रखने से दो गायों को दान करने का पुण्य मिलता है। प्रदोष का व्रत एक बार में 11 या 26 प्रदोष व्रत रखा जा सकता है। 11 या 26 प्रदोष व्रत करने के पश्चात इसका उद्यापन कर देना चाहिए। तभी इस व्रत का पूरा लाभ प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत के उद्यापन में कुछ खास बातों का हमें ध्यान रखना आवश्यक होता है।

(4). प्रदोष व्रत में भोजन कब किया जाता है?

उत्तर:- त्रयोदशी तिथि के अगले दिन चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव जी का पुनः विधि-विधान से पूजा करने के पश्चात भोजन ग्रहण करना चाहिए। साधकों को प्रदोष व्रत के दिन सत्संग और कीर्तन का भी आयोजन करना चाहिए। दिनभर भोलेनाथ के मंत्रों का जाप करते रहना चाहिए। इस व्रत के दिन साधक को मांसाहार बिल्कुल भी नहीं ग्रहण करना चाहिए।

(5). प्रदोष व्रत में दूध पी सकते हैं क्या?

उत्तर:- प्रदोष व्रत के दिन पूजा करने के पश्चात दूध ग्रहण कर सकते हैं।

(6). क्या मासिक धर्म में प्रदोष का व्रत किया जा सकता है?

उत्तर:- हां, मासिक धर्म में भी प्रदोष का व्रत किया जा सकता है, क्योंकि वैज्ञानिक आधार पर ऐसा कोई भी कारण नहीं है कि मासिक चक्र के दौरान महिलाओं के लिए कोई काम वर्जित हो।

(7). प्रदोष व्रत के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

उत्तर:- प्रदोष व्रत के दिन शाम में प्रदोष काल में भगवान शिव शंकर की पूजा अर्चना तथा आरती करनी चाहिए। प्रदोष व्रत के दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। किसी के साथ वाद-विवाद नहीं करना चाहिए। किसी को अपशब्द भी नहीं बोलना चाहिए।

(8). प्रदोष व्रत से क्या लाभ होता है?

उत्तर:- प्रदोष व्रत ज्योतिषीय ग्रह सूर्य से जुड़ा हुआ है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ग्रह सक्रिय होते हैं। इस दिन प्रदोष व्रत करने से यश, मान-सम्मान, अच्छा स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा शक्ति की प्राप्ति होती है। यदि किसी की कुंडली में सूर्य नीच है, या अशुभ है तो उनके लिए यह प्रदोष व्रत अत्यंत लाभकारी होता है।

(9). शिव प्रदोष पूजा कैसे किया जाता है?

उत्तर:- सूर्योदय और सूर्यास्त से पहले का समय गोधूलि काल पूजा के लिए शुभ समय माना जाता है। प्रदोष व्रत विधि करने के लिए सबसे पहले स्नान आदि से निवृत हो जाना चाहिए। शिव परिवार की प्रारंभिक पूजा करें तथा अनुष्ठान के बाद भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करें तथा उनकी ऊर्जा को एक पवित्र कलश में जागृत करें।

(10). कौन सा प्रदोष सबसे अच्छा होता है?

उत्तर:- शनि प्रदोष शनि ग्रह के अनुरूप शनिवार को होने वाला प्रदोष अन्य प्रदेशों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। शनि प्रदोष का महत्व मध्य भारत के मध्य प्रदेश राज्य के एक शहर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से निकटता से संबंधित है।

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अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।💐💐

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