Sankashti Chaturthi Nov 2023 date and time in hindi : संकष्टी चतुर्थी 2023, इस पूजन विधि से शीघ्र प्राप्त होगी गणपति की आशीर्वाद

दोस्तों, बल बुद्धि और विवेक के देवता प्रथम पूज्य गणेश जी को माना जाता है। गणेशजी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। इसलिए गणाधिप संकष्टी चतुर्थी त्योहार के शुभ अवसर पर Sankashti Chaturthi Nov 2023 date and time in hindi post में गणेश भगवान को प्रसन्न करने की विशेष पूजा विधि का वर्णन किया गया है।

गणपति भगवान 

प्रथम पूज्य गणेश जी अपने भक्तों की सभी समस्याओं और कष्टों को हरते हैं। अपने भक्तों के जीवन के सभी परेशानियों तथा विध्नों को दूर कर अनेक प्रकार की खुशियों का संचार करते हैं। इनकी कृपा जिसको प्राप्त हो जाए, उसका जीवन खुशहाल हो जाता है।

संकष्टी चतुर्थी व्रत 

संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने के दिन भगवान गणेश जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस पूजा से गणेश जी प्रसन्न होते हैं, तथा अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। 

संकष्टी चतुर्थी का व्रत हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध त्योहार माना जाता है। हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पूर्व भगवान गणेश जी की पूजा अवश्य की जाती है। इन्हें प्रथम पूज्य भी कहा जाता है।

आपको जानकारी होगी कि देवी- देवताओं को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के व्रत उपवास किए जाते हैं। इनमें से भगवान गणेश जी को प्रसन्न करने वाला संकष्टी चतुर्थी व्रत काफी प्रचलित है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत प्रत्येक महीने में दो बार आती है।

इस दिन को प्रथम पूज्य गणेश की विशेष पूजा-अर्चना करने के लिए जाना जाता है। इस महीने की संकष्टी चतुर्थी 30 नवंबर को हो रही है‌। संकष्टी चतुर्थी का अर्थ होता है, संकट को हरने वाली चतुर्थी।

संकष्टी चतुर्थी के दिन गणपति की पूजा-अर्चना करने से हर प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है। चतुर्थी के दिन ही गौरी-पुत्र गणेश की पूजा-अर्चना करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है।

इस दिन सूर्योदय से लेकर चंद्र उदय तक का उपवास रखा जाता है। इसी व्रत में संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्र उदय होने के पर चंद्र देव को अर्ध्य अर्पित कर पारण किया जाता है।

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त

• हिंदू पंचांग के मुताबिक मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ इस वर्ष 30 नवंबर को दोपहर में 2:24 पर हो रहा है।

• चतुर्थी तिथि का समापन 1 दिसंबर को दोपहर 3:31 पर हो जाएगा।

• संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय को जल अर्ध्य अर्पित किया जाता है।

• इसलिए इस वर्ष 30 नवंबर को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का त्यौहार मनाई जाएगी।

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पूजा का शुभ समय

चौघड़िया मुहूर्त :- सुबह 6:55 AM से 8:14 AM तक

• लाभ उन्नति मुहूर्त :- दोपहर 12:10 PM से 1:28 PM तक

• अमृत मुहूर्त :- दोपहर 1:28PM से 2:45 PM तक

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर इस वर्ष बन रहे हैं तीन शुभ संयोग

इस वर्ष गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, शुभ योग तथा शुक्ल युग का निर्माण होगा।

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी को चंद्रोदय का समय

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन शाम 7:54 पर चंद्रोदय होगा। इस दिन चंद्र देव को अर्ध्य अर्पित करने के बाद ही पारण करना शुभ फलदायक माना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

• संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रथम पूज्य गणेश की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए प्रातः काल सूर्योदय से पहले ही उठकर स्नान कर लेना चाहिए।

• स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, तथा भगवान गणेश जी की ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प ले।

• संकष्टी चतुर्थी के दिन लाल रंग का वस्त्र धारण करना बेहद शुभ माना जाता है।

• विध्नहर्ता गणपति की पूजा करते समय जातक को अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए।

• गणपति की मूर्ति को फूलों से अच्छी तरह से सजा लीजिए।

• पूजा में तिल, गुड़ ,लड्डू, फूल, फल, तांबे के कलश में पानी, धूप ,चंदन, प्रसाद, केला, नारियल, पंचमेवा आदि रखें।

• मंगल मूर्ति गणपति की पूजा के समय मां दुर्गा की प्रतिमा पास रखना बेहद शुभ फलदायक माना जाता है।

• गणपति को रोली का टीका लगाएं ।

• फूल और जल अर्पित करें ।

• संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी को तिल के लड्डू तथा मोदक का भोग अवश्य लगाएं ।

• इसके पश्चात संकट हर्ता गणेश जी के मंत्रों का जाप करें।

• जो लोग संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखते हैं, उन्हें पूजा के पश्चात केवल फल, मूंगफली, खीर, साबूदाना, दूध ही खाना चाहिए।

• शाम के समय चांद निकलने से पहले गणेश भगवान की पूजा-अर्चना करें तथा संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें ।

• यह व्रत रात को चंद्र देव को अर्घ्य देने के पश्चात खोला जाता है।

संकष्टी चतुर्थी का महत्व

• संकष्टी चतुर्थी के दिन मंगल मूर्ति भगवान गणेश जी की पूजा करने से घर से सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर होते हैं,तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

• घर में हमेशा सुख-शांति-समृद्धि बनी रहती है।

• ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना करने से घर में आ रही सारी विपदाएं दूर हो जाती हैं,तथा व्यक्ति की सारी मनोकामनाओं की पूर्ति भी हो जाती है।

•  संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्र देव का दर्शन करना अति शुभ फलदायक माना जाता है।

• सूर्योदय से प्रारंभ होने वाला यह व्रत चंद्र देव के दर्शन करने के पश्चात पूरा होता है।

• इस दिन चंद्र देव को अर्ध्य देना अति उत्तम माना जाता है। ऐसा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

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अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद। 💐💐

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