Sarad purnima kab hai: 2023 |शरद पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का साया, आसमान से नहीं बरसेगा अमृत, दिन में ही पूरे होंगे अनुष्ठान

 Sarad Purnima kab hai  पोस्ट में शरद पूर्णिमा के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल कर पाएंगे। यदि आप ,शरद पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है? और इसका क्या महत्व है? से संबंधित प्रश्नों का उत्तर पाना चाहते हैं। तो इस पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

दोस्तों , प्रत्येक महीने में एक पूर्णिमा आती है। लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व कुछ खास बताया गया है।हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार शरद पूर्णिमा को विशेष माना जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को रास पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है ।

शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट रहता है। चंद्रमा इस दिन अपनी 16 कलाओं के साथ परिपूर्ण होता है ।चंद्रमा की किरणें इस दिन अमृत की वर्षा करती है।

 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा तिथि के दिन साधक को स्नान- दान करना चाहिए ।इससे साधक को लाभ प्राप्त होता है ।आपको बता दूं कि सभी पूर्णिमा तिथियों में शरद पूर्णिमा तिथि सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।

आपको मालूम होगी कि इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण इसी महीने में लगने वाले हैं ।इस बार का सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा ।इसलिए इसका सूतक काल का भी प्रभाव यहां नहीं माना जाएगा।

वहीं यदि शरद पूर्णिमा की बात की जाए तो चंद्र ग्रहण की छाया पड़ने के कारण इस वर्ष आसमान से अमृत की भी वर्षा नहीं होगी। सूतक लगने के कारण शरद पूर्णिमा के सभी अनुष्ठान दिन में ही संपन्न करने होंगे।

श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के द्वारा बताया गया कि सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन 14 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण और शरद पूर्णिमा 28 अक्टूबर को चंद्र ग्रहण लगेगा।

सूर्य ग्रहण इस बार भारत में दिखाई नहीं पड़ेगा। इसलिए इसका सूतक काल भी नहीं माना जाएगा। इसलिए पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन सभी प्रकार के आयोजन संपन्न किए जाएंगे।

आचार्य द्विवेदी ने कहा कि 9 सालों के बाद शरद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का संयोग बना रहा है।जो भारत में दृश्यमान होने वाला है। इसलिए शरद पूर्णिमा पर पूजा अर्चना सहित अन्य कार्यक्रम भी दिन में ही संपन्न किए जाएंगे। चंद्र ग्रहण मध्य रात्रि में पड़ेगा और इसका सूतक काल दोपहर के बाद प्रारंभ हो जाएगा।

इसलिए दोपहर के बाद से सभी मंदिरों के कपाट को बंद कर दिए जाएंगे। इसके कारण शरद पूर्णिमा पर बनाई जाने वाली खीर भी मध्य रात्रि में नहीं बनेगी। श्रद्धालु गण, यदि चाहें तो दूसरे दिन खीर का भोग भगवान को अर्पित कर सकते हैं।

ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के द्वारा बताया गया कि चंद्रग्रहण अश्विन नक्षत्र में और मेष राशि पर होगा । इस बार ग्रहण का प्रारंभ ईशान कोण से होगा और मोक्ष चंद्रमा के अग्नि कोण पर होगा ।

एक पक्ष में दो ग्रहण लगना शुभ नहीं माना जाता है। सूतक के कारण रात्रि में मंदिरों के पट को बंद कर दिए जाते हैं। इसलिए मंदिरों में भजन-कीर्तन तो किए जाएंगे ,परंतु खीर का भोग भगवान को अर्पित नहीं किया जा सकता है।

चंद्रग्रहण का प्रभाव

शुभ:- कर्क, मिथुन, वृश्चिक, धनु, कुंभ

मध्यम:- सिंह, तुला, मीन

अशुभ:– मेष, वृष, कन्या, मकर

चंद्रग्रहण का समय

ग्रहण का स्पर्श रात्रि 1:05 बजे

ग्रहण का मध्य रात्रि 1:44 बजे

ग्रहण का मोक्ष रात्रि 2:24 बजे

ग्रहण का सूतक दिन में 4:05 बजे

क्यों मनाई जाती है शरद पूर्णिमा?

इसके बारे में एक किवदंति है कि एक साहूकार के घर में दो बेटियां थी। दोनों ही पूर्णिमा का व्रत किया करती थी।हालांकि बड़ी बेटी पूरा व्रत करती थी। परंतु छोटी बेटी अधूरा व्रत करती थी ।

इसका परिणाम यह हुआ कि छोटी बेटी की संतान पैदा होते ही मृत्यु को प्राप्त कर लेती थी। उसने पंडितों से अपने संतानों की मृत्यु होने के बारे में पूछी ,तो उन्होंने बताया कि तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती थी।

इसीलिए तुम्हारी संतान जन्म लेते ही मर जाती है। अब तुम पूरे विधि-विधान से पूर्णिमा का व्रत करोगी तो तुम्हारी संतान जीवित रह पाएगी।

बड़ी बहन के पुण्य से जीवित हुआ बच्चा

यह सुनकर छोटी बेटी ने पूरे विधि-विधान से शरद पूर्णिमा का व्रत करने लगी। इसके बावजूद उसकी संतान पैदा होते ही मर जाती थी ।

इस बात से दुःखी होकर छोटी बेटी ने अपनी संतान को लिटा कर ऊपर से कपड़ा ढक दिया।फिर बड़ी बहन को बुलाकर उसी जगह पर बैठने को कहा ,जहां उसने अपनी संतान को कपड़े से ढकी थी। जब उसकी बड़ी बहन वहां बैठने लगी तो उसका घाघरा बच्चे के शरीर से स्पर्श हुआ और वह रोने लगा।

विधि-विधान से करने लगी व्रत 

यह देखकर बड़ी बहन ने कहा कि तुम मुझ पर कलंक लगाना चाहती थी।मेरे बैठने से बच्चा मर जाता।यह कहने पर छोटी बहन ने कहा ,की यह तो पहले से ही मरा हुआ था।

तेरे ही भाग्य से यह फिर से जीवित हो गया है। तेरे पुण्य के कारण मेरा बच्चा फिर से जीवित हो गया है ।इस घटना के पश्चात छोटी बेटी प्रत्येक वर्ष शरद पूर्णिमा का व्रत पूरे विधि-विधान के साथ करने लगी और अब उसके बच्चे दीर्घायु हो गए।

मिलती है मां लक्ष्मी का आशीर्वाद, करें यदि यह उपाय 

शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी अपनी सवारी उल्लू पर सवार होकर धरती पर भ्रमण करती हैं ।और अपने भक्तों के सारी समस्याओं को दूर करने के लिए उनको वरदान देती हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन माता लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इसलिए धन प्राप्ति के लिए भी यह तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है।

शरद पूर्णिमा के दिन घर में सुख शांति समृद्धि के लिए

✓रात्रि के समय माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए।

✓उन्हें गुलाब के फूलों के माला अर्पित करना चाहिए।

✓माता लक्ष्मी को सफेद मिठाई और सुगंध भी अर्पित करना चाहिए।

✓इस दिन “ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मये नमः” का जाप करना चाहिए।

Sarad purnima kab hai  पोस्ट में विस्तार से sarad purnima  ke बारे में बताया गया है।माता लक्ष्मी इस दिन प्रसन्न होकर जीवन की तमाम समस्याओं का समाधान करती हैं। बस उनकी सच्चे मन से आराधना करनी चाहिए और जब धरती पर साक्षात आएं तो इससे पावन घड़ी और क्या हो सकती है?”

Sarad purnima kab hai

शरद पूर्णिमा पर खीर का सेवन

हिंदू मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की रौशनी में रखी खीर का सेवन करने से अनेक रोगों से मुक्ति मिलती है। इस खीर को चर्म रोग से परेशान लोगों के लिए भी बहुत ही अच्छा बताया गया है।

यह खीर आंखों से जुड़ी बीमारियों से परेशान लोगों के लिए भी बहुत ही लाभदायक होती है। इसके अतिरिक्त भी कई मामलों में इस पूर्णिमा को खास माना जाता है।

दोस्तों उम्मीद है कि Sarad purnima kab hai पोस्ट आपको अच्छी लगी होगी। ऐसी ही और जानकारियां हासिल करने के लिए इस वेबसाइट के साथ हमेशा बने रहे।

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